सूत्रों का कहना है कि सच यह है कि बैरक नंबर 3 के अधिकतर कैदी रात को मन ही मन हनुमान चालीसा जपते हैं, या अपने धर्म के अनुसार इबादत करने लगते हैं। दरअसल, जेल के हाई सिक्योरिटी जोन में बंद रहे अफजल गुरु को 9 फरवरी, 2013 को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी। अफजल गुरु के बारे में 8 फरवरी की रात तक कैदियों को इल्म नहीं था कि अगली सुबह तिहाड़ में उसे फांसी दी जानी है। 9 फरवरी की सुबह 8 बजे अफजल गुरु को फांसी पर जैसे ही लटकाया गया, दोपहर तक तिहाड़ के कैदियों को पता चल गया।