जब भोपाल में गैस रिसाव हुआ तो देखते ही देखते न जाने कितने लोग उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, खांसी और आंखों में जलन की समस्या से मौत के मुंह में समाते चले गए। चारों ओर मौत का तांडव हो रहा था। चीखती-चिल्लाती आवाजों के बीच कुशवाह दंपति धुंधले, डरे- सहमे चेहरों को साफ देख रहे थे। लेकिन, इस कठिन समय में भी यह परिवार घबराया नहीं, क्योंकि इनके यहां रोज 'अग्निहोत्र हवन' होता था। उस दिन भी हुआ था। रात में भी उन्होंने अग्निहोत्र हवन, त्र्यंबकम होम के साथ जारी रखा। इस तरह लगभग 20 मिनट के अंदर ही उनका घर और उसके आस-पास का वातावरण 'मिथाइल आइसो साइनाइड गैस' से मुक्त हो गया।