भगवान मुरुगुन
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एक ईश्वर, अनेक देवता
इस्लाम, ईसाइयत और यहूदी धर्म में एक ही ईश्वर है। उनका संस्थापक एक है और मूल धर्मग्रंथ भी एक है। हिंदू धर्म इससे अलग है। इसका कोई एक संस्थापक नहीं है। धर्मग्रंथ कई हैं, लेकिन बाइबल या कुरान की तरह हिंदुओं का कोई एक सर्वमान्य ग्रंथ नहीं है। हिंदू धर्म में देवता भी कई हैं, जिनको एक ही परमात्मा के कई रूप माना जा सकता है। इस विश्वास को मानने के रास्ते भी कई हैं। अधिकांश हिंदू थईपुसम नहीं मनाते या भगवान मुरुगन को नहीं पूजते। यह एक स्थानीय त्योहार है जिसे मलयेशिया का तमिल समुदाय मनाता है।
थईपुसम में भी पूजा के कई रूप हैं। बातू गुफाओं में पूजा के लिए आए चौधरी कन्नन कहते हैं, "यह उन (श्रद्धालुओं) के ऊपर है कि वे कैसे अपनी श्रद्धा दिखाते हैं।" कुछ श्रद्धालु अपने माथे पर दूध का बर्तन लेकर चलते हैं। कुछ लोग सिर मुंडवाते हैं। कुछ लोग प्रार्थना करते हैं। कुछ श्रद्धालु घुटनों के बल चलकर परिक्रमा पूरी करते हैं। बच्चे की मन्नत पूरी होने पर भगवान मुरुगन का धन्यवाद करने के लिए कई लोग बच्चे को गन्ने से बंधे झूले में रखकर मंदिर पहुंचते हैं।