असल में 1951 में ही एमब्रोसुइस की बहू वर्ल्ड वेजिटेरियन कांग्रेस के लिए स्विट्जरलैंड के सरकारी प्रतिनिधि के तौर पर दिल्ली आई थीं। यहां उन्हें हिंदुस्तानी खानों का जायका इतना अच्छा लगा कि उन्होंने वापस अपने देश जाकर खुद के रात के खाने के लिए भारतीय पकवान बनवाने शुरू कर दिए। वो दिल्ली से धनिया, हल्दी, ज़ीरा, इलाइची बड़ी मात्रा में साथ ले गई थीं। यही नहीं, वो यहां से बहुत से पकवान बनाने का तरीका भी सीख कर गईं और अपने रेस्टोरेंट के रसोइयों को भी उन्हें बनाना सिखा दिया। और देखते ही देखते इनके रेस्टोरेंट में भारतीयों की भीड़ जुटने लगी। यहां तक कि जब भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई स्विट्जरलैंड गए, तो उन्होंने भी यहां भारतीय खानों का लुत्फ लिया। और जब स्विस एयरलाइंस ने हौस हिल्ट की मदद से अपने यात्रियों को शाकाहारी भोजन परोसना शुरू किया तो इससे ये रेस्टोरेंट दुनिया भर में मशहूर हो गया।