वहीं, जो जुड़वां बच्चे एक जैसे नहीं दिखते, उनके औसत 50 फीसद जीन्स एक जैसे होते हैं। अब एक जैसे दिखने वाले जुड़वां बच्चे अगर पढ़ाई में एक जैसे स्तर को हासिल करते हैं, तो साफ है कि उनके जीन्स का पढ़ाई पर असर होता है और अगर उनकी पढ़ाई के स्तर में फर्क होता है, तो उसकी वजह भी बच्चों के डीएनए में फर्क हो सकती है। अगर बच्चों का स्कूल का ग्रेड प्राइमरी से लेकर सेकेंडरी स्कूल तक एक जैसा ही रहता है, तो इसके पीछे बड़ी वजह बच्चों का जीन सीक्वेंस होता है। बच्चों के पढ़ाई के स्तर में 70 फीसद योगदान उनके डीएनए सीक्वेंस पर निर्भर करता है, तो 25 फीसद उनके माहौल पर। बाकी का पांच फीसद फर्क अलग-अलग दोस्तों और टीचर के होने से होता है। अगर जुड़वां बच्चों के ग्रेड में बहुत उतार-चढ़ाव आया, तो इसकी बड़ी वजह ये रही कि उन जुड़वां बच्चों को पढ़ाई और रहन-सहन का अलग-अलग माहौल मिला।