आपने अभी तक अंगों के आदान-प्रदान के बारे में तो सुना था लेकिन क्या कभी याददाश्त की अदला-बदली के बारे में सुना है..? चौंक गए न... दरअसल, साइंस ने इसे भी संभव कर दिखाया है। जी हां, अगर आपको इस बात पर यकीन न हो तो यह खबर पढ़ लें...
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वैज्ञानिक
इसे विज्ञान की बड़ी उपलब्धि ही कहा जाएगा क्योंकि आज से पहले ऐसा नहीं हुआ है। वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक याद्दाश्त का स्थानांतरण किया है। वैज्ञानिकों ने यह शोध एक समुद्री जीव पर किया था। शोध के द्वारा एक समुद्री जीव से दूसरे समुद्री जीव में स्मृति को स्थानांतरित किया गया।
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फाइल फोटो
उनका मानना है कि यह भविष्य में अल्जाइमर जैसी घातक बीमारियों के उपचार में सहायक हो सकता है। आरएनए या रिबोन्यूक्लिक एसिड को सेलुलर मैसेंजर के रूप में जाना जाता है, जो प्रोटीन बनाता है और कोशिका के अन्य हिस्सों में डीएनए के निर्देशों को पूरा करता है।
अब प्रोटीन कोडिंग के कोशिकाओं की महत्वपूर्ण क्रियाओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी। इसमें कोशिकीय प्रक्रियाओं का विकास, बीमारी और विनियमन शामिल है। अमेरिका में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी और लॉस एंजिल्स के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया।