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Apophis Asteroid: धरती के पास आ रहा 'तबाही का देवता', परमाणु बम से भी है खतरनाक, टकराया तो आएगा महाप्रलय

Sun, 09 Jan 2022 06:49 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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धरती के पास आ रहा 'तबाही का देवता' - फोटो : Pixabay
साल 2022 (New Year 2022) के लिए कई भविष्यवक्ताओं ने डरावनी भविष्यवाणी की है। अब इस बीच रूस के वैज्ञानिकों ने बड़ी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि इस दशक के आखिरी तक एस्टेरॉयड धरती के पास आ रहा है। ये एस्टेरॉयड दुनिया के सबसे  बड़े परमाणु बम से 30 गुना शक्तिशाली है। इस एस्टेरॉयड का नाम अपोफिस है जिसे तबाही का देवता भी कहते हैं। यह साल 2029 अप्रैल में पृथ्वी के करीब से जाएगा। पहले वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया था कि यह साल 2068 में धरती के पास से गुजरेगा, लेकिन यह गलत पाया गया है। 

रूसी वैज्ञानिकों का कहना है कि ये अपोफिस एस्टेरॉयड धरती से 39 हजार किमी दूरी से जाएगा। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इतनी दूरी पर ही सैटलाइट स्थापित किए जाते हैं जिससे चैनलों पर प्रसारण होता है। अपोफिस इतना शक्तिशाली है कि अगर पृथ्वी से टकराता है तो 88 करोड़ टन TNT के विस्फोट के बराबर तबाही मचाएगा। 1,115 फुट चौड़ा ये एस्टेरॉयड बहुत तेजी से धरती की तरफ आ रहा है। 
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धरती के पास आ रहा 'तबाही का देवता' - फोटो : Pixabay
गरम हो रहा है एस्टेरॉयड

फ्रांस के एफिल टावर से भी बड़ा है तबाही का देवता अपोफिस। अमेरिका के एरिजोना की वेधशाला ने साल 2004 में अपोफिस एस्टेरॉयड की खोज की थी। इसके बाद से ही इस पर वैज्ञानिक नजर रखे हुए हैं। विश्लेषण से पता चला है कि इसकी गति तेज हो गई है और पता चला है कि सूर्य की रोशनी से अपोफिस गरम हो रहा है। नासा ने कहा है कि ये एस्टेरॉयड तीसरा सबसे बड़ा खतरा है। 
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धरती के पास आ रहा 'तबाही का देवता' - फोटो : Pixabay
वैज्ञानिकों ने बताया है कि जब ये एस्टेरॉयड धरती के नजदीक आएगा, तभी इसके बारे में अधिकारी जानकारी प्राप्त हो पाएगी। हालांकि वैज्ञानिकों ने कहा है कि यह साफ है कि एस्टेरॉयड धरती से टकराने नहीं जा रहा है। अपोफिस का धरती के पास से गुजरना एक बड़ी घटना है। पहली बार कोई खतरनाक और विशाल एस्टेरॉयड धरती के इतने पास से जाएगा। 
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धरती के पास आ रहा 'तबाही का देवता' - फोटो : Pixabay

वैज्ञानिकों ने यह भी जानकारी दी है कि धरती के उपग्रह और अंतरिक्ष स्टेशन को भी इससे कोई नुकसान नहीं होगा। रेडॉर इमेज से पता चला है कि निकेल और लोहा से बने अपोफिस एस्टेरॉयड की लंबाई लगातार बढ़ रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी इसके और विश्लेषण की जरूरत है। 
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