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इन दो गांवों के लोग कभी आपस में नहीं जोड़ते वैवाहिक संबंध, 5000 साल से चली आ रही है परंपरा

Tue, 12 Mar 2019 02:34 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
नंदगांव और बरसाना का नाम तो आपने सुना ही होगा। ये दो ऐसे गांव हैं जो भगवान कृष्ण के काफी करीब रहे हैं। यहां की लट्ठमार होली तो विश्व प्रसिद्ध है, जिसकी परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसके अलावा यहां एक ऐसी भी परंपरा है, जिसके कारण इन दोनों ही गांवों के लोग कभी आपस में वैवाहिक संबंध नहीं जोड़ते। यह अनोखी परंपरा करीब पांच हजार साल से चली आ रही है। 
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नंदगांव बरसाना होली - फोटो : Social media
नंदगांव और बरसाना के बीच भले ही पिछले पांच हजार साल से कोई भी शादी नहीं हुई है, लेकिन फिर भी इन दोनों ही गांवों के लोग आपस में ससुराल की रस्म निभाते हैं। नंदगांव के युवा मानते हैं कि बरसाना उनका ससुराल है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि दोनों गांवों में हर जाति बिरादरी के लोग रहते हैं, लेकिन किसी ने भी आज तक न तो बरसाना में बेटे की शादी की है और न ही नंदगांव में किसी ने बेटी की। 

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राधा-कृष्ण - फोटो : फाइल फोटो
दरअसल, इस परंपरा को निभाने के पीछे भगवान कृष्ण और राधा रानी का अटूट प्रेम है, जिसे दोनों गांवों के लोगों ने अब तक सहेज कर रखा हुआ है। बरसाना के लोगों का कहना है कि यहां का सिर्फ एक ही दामाद रहेगा और वो हैं श्रीकृष्ण, जबकि नंदगाव की बहू भी सिर्फ एक ही रहेंगी और वो हैं राधा रानी। 
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राधा-कृष्ण - फोटो : फाइल फोटो
नंदगांव और बरसाना के लोग मानते हैं कि अगर इन दोनों ही गांवों के बीच रिश्ता जुड़ गया तो लोग राधा-कृष्ण के प्रेम को भूल जाएंगे। उनके इसी प्रेम की धरोहर को नंदगांव और बरसाना के लोग आज तक सहेजे हुए हैं। 
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राधा रानी मंदिर, बरसाना - फोटो : Social media
कहते हैं कि बरसाना के बूढ़े-बुजुर्ग नंदगांव को राधा रानी का ससुराल मानते हुए उसकी सीमा का पानी तक नहीं पीते। आज भी बरसाना में नंदगांव से आए किसी भी व्यक्ति को खाली हाथ विदा नहीं किया जाता। उन्हें ससम्मान ही विदा किया जाता है।
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