समस्तीपुर में हर साल नागपंचमी के मौके पर सांपों का मेला लगता है। खासतौर पर समस्तीपुर के सिंघिया, नरहन, डुमरिया, खदियाही, बेसरी, चकहबीब, मुस्तफापुर सहित पूरे इलाके में ये मेला छोटे या बड़े स्तर पर लगता है। मेला लगने से एक महीने पहले ही इसकी तैयारी शुरू हो जाती है। स्थानीय लोग सांप पकड़कर घरों में रखना शुरू कर देते हैं और नागपंचमी के दिन वो सांप लेकर हजारों की संख्या में झुंड बनाकर अहले सुबह नदी के घाट पर जाते हैं। 60 साल के महेन्द्र पासवान बीते 45 साल से भी अधिक समय से बेला भगवती स्थान का काम संभाल रहे हैं। स्थानीय लोग इन्हें 'भगत' कहते हैं।
महेन्द्र को ये विरासत अपने पिता और दादा लखन पासवान से मिली है। महेन्द्र बताते हैं कि फिलहाल केरल में एक टाइल्स फैक्ट्री में काम करने वाले उनका बड़ा बेटा उनके बाद ये 'खानदानी' काम संभालेगा। महेन्द्र बताते हैं, "नागपंचमी से एक दिन पहले रात भर जागरण होता है। सभी लोग सांप, नाग लेकर जुटते है और रात भर की पूजा अर्चना के बाद हम लोग सुबह जुलूस निकालते हुए नदी जाते हैं और स्नान करके सांप या नाग को दूध लावा खिलाकर जंगल में छोड़ देते है।"