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राम मंदिर: यहां पर कहते हैं माता सीता को दीदी और भगवान राम को जीजा, जानिए आखिर क्या है वजह

Mon, 22 Jan 2024 01:38 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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mata janki mandir - फोटो : अमर उजाला
राम मंदिर: रामायणकाल में माता सीता का जन्म मिथिला के राजा जनक के यहां बैसाख माह की नवमी तिथि को हुआ था। मिथिला की राजधानी का नाम जनकपुर है, तो नेपाल का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां पर जानकी मंदिर स्थित है, जिसकी कलाकृति बेहद अद्भुत है। यह मंदिर माता सीता को समर्पित है, जो एक ऐतिहासिक स्थल है। जनकपुर में माता सीता का जन्म हुआ और उनके विवाह के बाद यह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का ससुराल बना।

इस मंदिर में आज भी ऐसे प्रमाण हैं, जिनमें रामायणकाल का उल्लेख है। अयोध्या में रामलला श्रीविग्रह की प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर हम आपको आज नेपाल के जानकी मंदिर यानि माता सीता के जन्म स्थल के बारे में कुछ रोचक तथ्य बताते हैं...

क्या है जानकी मंदिर का इतिहास? 

जानकीपुर धाम के रूप में प्रसिद्ध माता सीता का यह मंदिर 4860 वर्गमीटर में फैला है। बताया जाता है कि करीब 16 साल में इस मंदिर का निर्माण पूरा हुआ है।
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mata janki mandir - फोटो : iStock
मंदिर का निर्माण 1895 ईस्वी में शुरु हुआ और 1911 में पूरा हुआ। इस मंदिर के आसपास 115 सरोवर और कुंड हैं। इसमें गंगा सागर, परशुराम सागर एवं धनुष सागर सबसे अधिक प्रसिद्ध है। 
 
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mata janki mandir - फोटो : iStock
राजपुताना महारानी वृषभभानू कुमारी ने माता सीता के इस मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर के निर्माण में करीब 9 लाख खर्च हुए थे। इसलिए मंदिर को नौलखा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इतिहासकार बताते हैं कि 1657 ईस्वी में यहां पर माता सीता की सोने की मूर्ती मिली थी।  

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mata janki mandir - फोटो : iStock
माता सीता का विवाह

बताया जाता है कि भगवान राम और माता सीता का विवाह यहीं पर हुआ था। भगवान राम ने यहीं पर माता सीता से विवाह के लिए स्वयंवर में भगवान शिव का धनुष तोड़ा था। यहां पर मौजूद पत्थर के टुकड़े को धनुष का अवशेष बताया जाता है। 

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mata janki mandir - फोटो : iStock
विवाह मंडप को क्या है मान्यता

मंदिर के प्रांगन में विवाह मंडप मौजूद है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यही वह मंडप है जहां पर माता सीता और भगवान राम का विवाह हुआ था। विवाह मंडप के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। मान्यता है कि यहां पर आने से सुहाग की उम्र लंबी होती है। आसपास के लोग विवाह के अवसर पर यहां से सिंदूर ले जाते हैं। बताया जाता है कि यहां पर माता सीता को लोग दीदी कहते हैं और भगवान राम को जीजा कहते हैं। 
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