'तिन तब सुनत तुरंत ही, दीन्ही छोड़ पतंग। खेंच लइ प्रभु बेग ही, खेलत बालक संग।'
पवनपुत्र बाल रूप हनुमानजी आकाश में उड़ते हुए इन्द्रलोक पहुंचे। वहां जाकर उन्होंने देखा कि एक स्त्री उस पतंग को अपने हाथ में पकड़े हुए खड़ी है। हनुमान जी ने स्त्री से पतंग देने का आग्रह किया। इस पर जयंत की पत्नी ने कहा 'यह पतंग किसकी है?' वो पतंग उड़ाने वाले के दर्शन करना चाहती हैं। हनुमान जी यह सुनकर लौट आए और सारा वृत्तांत श्रीराम को कह सुनाया।