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भारत में है एशिया की सबसे बड़ी तोप, जिसका इस्तेमाल कभी युद्ध में नहीं हुआ

Mon, 23 Mar 2020 10:57 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एशिया की सबसे बड़ी तोप - फोटो : Social media
विश्व इतिहास में एक से बढ़कर खतरनाक युद्ध हुए हैं, जिनमें बंदूकों से लेकर बड़े-बड़े तोपों का भी इस्तेमाल किया गया है। आज हम आपको एशिया की सबसे बड़ी तोप के बारे में बताने जा रहे हैं, जो भारत में मौजूद है। इसमें सबसे हैरानी वाली बात ये है कि इस तोप को मुख्य तौर पर युद्ध के लिए ही बनाया गया था, लेकिन युद्ध में इसका इस्तेमाल कभी नहीं हुआ।
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एशिया की सबसे बड़ी तोप - फोटो : Social media
इस तोप को 'जयवाण तोप' के नाम से जाना जाता है। इसे आमेर महल के पास स्थित जयगढ़ के किले में रखा गया है और सबसे खास बात कि यह जब से बना है, तब से उसी किले में मौजूद है। वर्ष 1720 में जयपुर किले के प्रशासक जयसिंह द्वितीय ने इस तोप को जयगढ़ किले में ही खासतौर पर बनवाया था। उन्होंने अपनी रियासत की सुरक्षा के लिए इसे बनवाया था। 
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एशिया की सबसे बड़ी तोप - फोटो : Social media
इस तोप की नली से लेकर अंतिम छोर तक की पूरी लंबाई करीब 31 फीट है। यह एक विशालकाय तोप है, जिसका वजन करीब 50 टन बताया जाता है। कहते हैं कि इस तोप की मारक क्षमता करीब 30-35 किलोमीटर है और इसे एक बार फायर करने के लिए करीब 100 किलो गन पाउडर की जरूरत पड़ती थी। 

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एशिया की सबसे बड़ी तोप - फोटो : Social media
इस तोप से सिर्फ एक ही बार गोला दागा गया था और वो भी परीक्षण के दौरान। कहते हैं कि जब इससे गोला दागा गया तो वह किले से करीब 35 किलोमीटर दूर जाकर गिरा था और जहां गिरा था, वहां एक बड़ा सा तालाब बन गया था। वह तालाब आज भी मौजूद है, जो पानी से भरा हुआ है। 
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एशिया की सबसे बड़ी तोप - फोटो : Social media
कहते हैं कि जब इस तोप से गोला दागा जाने वाला था, तो उसे पानी के टैंक के पास रखा गया था, ताकि इससे निकलने वाली खतरनाक शॉक तरंगों से बचा जा सके। हालांकि इसके बावजूद गोला दागने के दौरान कई सैनिकों और एक हाथी की शॉक तरंगों के कारण मौत हो गई थी। इसके अलावा आसपास के कई घर भी ढह गए थे। हालांकि इस बात का पुख्ता प्रमाण नहीं है कि ऐसा हुआ ही था। यह लोगों के बीच कही सुनी कहानी भी हो सकती है। 
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