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कुंभ खत्म होते ही अचानक कहां गायब हो जाते हैं नागा साधु? जानिए कैसी है नागाओं की रहस्यमयी दुनिया

Tue, 15 Jan 2019 05:30 PM IST
Asif Iqbal फीचर डेस्क, अमर उजाला
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Naga Sadhu
नागा साधुओं की दुनिया भी बड़ी ही रहस्यमयी होती है। कुंभ के शुरू होते ही वो अचानक से प्रकट हो जाते हैं और खत्म होते ही फिर न जाने कहां गायब हो जाते हैं। इसके बाद फिर वो अगले कुंभ या अर्धकुंभ में ही नजर आते हैं। आज हम नागाओं की उसी रहस्यमयी दुनिया से पर्दा उठाने जा रहे हैं, जिसके बारे में शायद ही किसी को पता हो। 
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Naga Sadhu
नागा साधुओं के बारे में कहा जाता है कि उन्हें दिन और रात मिलाकर सिर्फ एक समय ही भोजन करना होता है। उन्हें भिक्षा मांग कर ही अपना पेट भरना होता है। कहते हैं कि एक नागा साधु को अधिक से अधिक सात घरों से भिक्षा लेने का अधिकार होता है। अगर सातों घरों से उन्हें कोई भिक्षा ना मिले, तो उन्हें भूखे पेट ही रहना पड़ता है और अगर मिल जाए तो उसमें पसंद-नापसंद का कोई सवाल नहीं होता है, बल्कि उसी भोजन को उन्हें प्रेम से ग्रहण करना पड़ता है।   

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Naga Sadhu
नागा साधुओं को बहुत ही कठोर नियम का पालन करना होता है। उन्हें  पलंग, चारपाई या किसी अन्य बिस्तर पर सोने की मनाही होती है। वो सिर्फ और सिर्फ जमीन पर ही सोते हैं, चाहे कितनी भी गर्मी हो या जाड़ा हो। हर हालत में उन्हें इन नियमों का पालन करना ही पड़ता है। इसके अलावा नागा साधु अपनी पहचान भी छुपा कर रखते हैं। वो किसी से भी अपने बारे में बात नहीं करते हैं। 

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Naga sadhu - फोटो : Social media
कहते हैं कि नागा साधु एक जगह पर ज्यादा दिन तक कभी नहीं रहते। कुछ सालों तक एक गुफा या जंगल में रहने के बाद वो फिर दूसरी गुफा या जंगल में चले जाते हैं। इसी कारण उनके गुप्त स्थानों का किसी को भी पता नहीं चलता है। आमतौर पर कुंभ में देखा जाता है कि नागा साधु निर्वस्त्र ही रहते हैं। हालांकि कुछ नागा साधु ऐसे भी हैं जो वस्त्र धारण करते हैं। 
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Naga sadhu - फोटो : Reuters
कहा जाता है कि नागा साधुओं के पास रहस्यमयी ताकत होती है और ये ताकत वो कठोर तपस्या करके हासिल करते हैं। नागा साधु भगवान शिव के भक्त माने जाते हैं। इस कारण वो अपने पूरे शरीर पर भभूत लपेटे हुए रहते हैं। जंगल में रहने के दौरान ये साधु जड़ी-बूटी और कंदमूल के सहारे ही अपना पूरा जीवन काट लेते हैं। 
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Naga sadhu - फोटो : Social media
माना जाता है कि कोई भी नागा साधु किसी न किसी अखाड़े से जुड़ा होता है। जब उनकी दीक्षा पूरी हो जाती है तो वो अखाड़ा छोड़कर किसी जंगल में या पहाड़ों पर चले जाते हैं और वहीं रहकर साधना करते हैं। कहते हैं कि हर अखाड़े में एक कोतवाल रखा जाता है जो कुंभ या अर्धकुंभ आने पर उस अखाड़े के नागा साधुओं को बुलावा भेजता है, जिसके बाद वो रहस्यमयी तरीके से सीधे कुंभ पहुंच जाते हैं। 
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