प्रतीकात्मक तस्वीर
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अब सवाल पैदा होता है कि उम्र से हमारी मुराद क्या है। कोई भी जानदार पैदा होने से मरने तक जितना समय जीवित रहता है वो उम्र कहलाती है। लेकिन ये उम्र की कालानुक्रमिक परिभाषा है। उम्र की एक जैविक परिभाषा भी है। जिसका पैमाना सेहत की गुणवत्ता के आधार पर होता है। यानी अगर किसी की उम्र 20 साल है, लेकिन उसकी सेहत खराब रहती है तो जाहिर है उसका शरीर तेजी से कमजोर हो रहा है और वो बूढ़ापे की ओर बढ़ रहा है। इसके लिए फ्रेलिटी इंडेक्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसके तहत किसी व्यक्ति की बीमारियां, उसके दिन भर के कामकाज का ब्यौरा, और उसकी समझ को परखा जाता है। फिर इसे दो स्तर पर बांटा जाता है। पहला है जीन का स्तर।
जीन शरीर में प्रोटीन पैदा करते हैं। और ये उम्र के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग स्तर पर पैदा होते हैं। दूसरा है शरीर में प्रतिरोधक क्षमता वाली कोशिकाओं की मात्रा। जिस तेजी से जैविक आयु बढ़ती है उसमें कई वंशानुगत कारक, इंसान की दिनचर्या और उसकी मांसिक सेहत बहुत असर डालती है।