आमतौर पर मंदिरों के नाम उनमें विराजमान देवताओं के नाम पर ही रखे जाते हैं, लेकिन भारत में एक ऐसा भी मंदिर है, जिसका नाम किसी भगवान के नाम पर न होकर उसे बनाने वाले के नाम पर रखा गया है। माना जाता है कि शायद दुनिया में इस तरह की विशेषता रखने वाला यह एकमात्र मंदिर है। इसे रामप्पा मंदिर के नाम से जाना जाता है, जो तेलंगाना में मुलुगू जिले के वेंकटापुर मंडल के पालमपेट गांव में एक घाटी में स्थित है। वैसे तो पालमपेट एक छोटा सा गांव है, लेकिन यह सैकड़ों साल से आबाद है।
रामप्पा मंदिर में भगवान शिव विराजमान हैं, इसलिए इसे 'रामलिंगेश्वर मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर के बनने की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है। कहते हैं कि 1213 ईस्वी में आंध्र प्रदेश के काकतिया वंश के महाराजा गणपति देव के मन में अचानक एक शिव मंदिर बनाने का विचार आया। इसके बाद उन्होंने अपने शिल्पकार रामप्पा को आदेश दिया कि वो एक ऐसा मंदिर बनाए, जो सालों तक टिका रहे।