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इन डायनासोरों ने चींटियां खाने के लिए किया था अपना आकार छोटा- चीनी शोध

Thu, 08 Jul 2021 04:47 PM IST
Shashi Shashi फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

अल्वारेजसॉर प्रजाति के डायनासोर ने अपने खाने की खुराक में बदलाव किया था और इन डायनासोर ने चींटियों को खाना शुरू कर दिया था। जिसके कारण बाद में उनका आकार तेजी से कम होने लगा था और पीढ़ी दर पीढ़ी उनका आकार छोटा होता चला गया। जिसके बाद मिलने वाले नमूनों के अनुसार ये एक मुर्गे जितने आकार के हो गए थे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डायनासोर हमेशा से ही लोगों के लिए कौतूहल का विषय रहे हैं। इन पर कई सारे शोध हुए जो अब तक जारी हैं। डायनासोर का नाम सुनते ही लोगों के मन में एक विशालकाय जानवर की तस्वीर बनती है लेकिन क्या आपको पता है कि ठंडे खून के ये जीव छोटे आकार के भी होते थे। हाल ही में चीन के शोधकर्ताओं ने जीवाश्मों का अध्ययन किया है जिसके बाद उन्हें बहुत ही छोटे आकार के डायनासोर के बारे में बहुत ही रोचक जानकारी मिली है। शोधकर्ताओं के मुताबिक अल्वारेजसॉर प्रजाति के डायनासोर ने अपने खाने की खुराक में बदलाव किया था और इन डायनासोर ने चींटियों को खाना शुरू कर दिया था। जिसके कारण बाद में उनका आकार तेजी से कम होने लगा था।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media
कहां और किसने किया ये अध्ययन
बीजिंग में इंस्टीट्यूट ऑफ वर्टिबरेट पेलिओन्टोलॉजी एवं पेलिओएंथ्रोपोलॉजी और ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के पीएचडी छात्र जिचुआन किन की अगुआई में यह अध्ययन किया गया। जिसमें पाया गया कि अल्वारेजसॉर डायनासोर ने आज से करीब 10 करोड़ साल पहले अपनी खुराक में बदलाव करते हुए चींटियों को खाना शुरु किया था और इस खुराक को अपनाने के बाद अपना आकार बहुत तेजी से कम करना शुरू कर दिया था। ये डायनासोर मुर्गे के आकार तक छोटे हुआ करते थे।
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(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : self
पहले ऐसा होता है इन डायनासोर का आकार
पुराने नमूनों के आधार पर अध्ययन में पाया गया कि इन डायनासोर का आकार आकार विशाल टर्की या छोटे शतरमुर्ग के आकार के बराबर हुआ करता था। ये कम से कम 10 से 70 किलो के भार के वजनी थे। उस समय के अधिकांश अल्वारेजसॉर डायनासोर पतले, दो पैरों वाले हुआ करते थे और छिपकली, शुरुआती स्तनपायी जीव और शिशु डायनासोर के तौर पर अपनी खुराक लेते थे।

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(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
खुराक में बदलाव के कारण हुआ आकार में बदलाव
अध्ययन के मुताबिक अल्वारेजसॉर के उद्भव काल के बाद के समय में नमूनों के आकार के अनुसार इनका आकार एक मुर्गे के बराबर छोटा हो गया था। जिचिन के अनुसार है कि उनके आकार में इस तरह का बदलाव इसलिए हुए क्योंकि वे चींटियां खाने लगे थे। जिचुआन के पर्यवेक्षकों में से एक ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर माइकल बेंटन का इस बारे में कहना है कि खाने की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण खुराक में यह बड़ा बदलाव हुआ होगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
लगभग दर्जनभर नमूनों को लेकर किया गया अध्ययन
जिचुन ने अल्वारेजसॉर प्रजाति डायनासोर के दर्जन भर नमूनों का अध्ययन किया और लाखों साल तक किस तरह उनके आकार में बदलाव हुआ इसका अध्ययन किया। इस तरह से पीढ़ी दर पीढ़ी उनके आकार में बदलाव हुआ। अल्वारेजसॉर डायनासोर उत्तर ज्यूरासिक काल से लेकर उत्तर क्रिटेशियस काल में रहा करते थे। इसका मतलब से वे 16 करोड़ साल से 7 करोड़ साल पहले के समय में चीन मंगोलिया, और दक्षिण अमेरिका में पाए जाते थे।
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