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अजब-गजब: खून चूसने वाली जोंक को ढूंढने में लगे हैं डॉक्टर, ब्लैक फंगस के इलाज में होगा इस्तेमाल

Tue, 18 May 2021 08:02 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
जोंक एक ऐसी कीड़ा है, जो खून चूसने के लिए जानी जाती है। इतना ही नहीं इस खून चूसने वाली किड़े का इस्तेमाल इलाज के लिए भी किया जाता है। आपको ये बात थोड़ी अजीब जरूर लग रही होगी, लेकिन यह पूरी तरह से सच है। आयुर्वेदिक या फिर प्राकृतिक चिकित्सा के अंतर्गत, जलौका पद्धति से कई रोगों का इलाज किया जाता है। लेकिन बिहार में इन दिनों खून चूसने वाली जोंक कोरोना मरीजों के इलाज के लिए ढूंढे जा रहे हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
जोंक शरीर से गंदा खून चूस लेते हैं और मृत कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर के किसी हिस्से में जब स्किन खराब होती है और ब्लड सर्कुलेशन बंद हो जाता है, तो मृत कोशिकाओं को एक्टिव करने में जोंक काफी मददगार साबित होती हैं। बता दें कि जोंक दो तरह के होते हैं, सविष और निर्विष यानी विष वाले और बिना विष वाले।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
आयुर्वेदिक इलाज में बिना विष वाले जोंक को इस्तेमाल में लाया जाता है। बिना विष वाले जोंक की पहचान करना काफी आसान है। विष वाले जोंक गहरे काले रंग की और खुरदरी त्वचा वाली होती हैं, जबकि बिना विष वाले जोंक हरे रंग की चिकनी त्वचा वाली और बिना बालों वाली होती हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
बिहार की राजधानी पटना के राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में इन दिनों बिना विष वाली जोंक की तलाश जारी है। दरअसल, कोरोना के बाद ब्लैक फंगस यानी म्यूकोरमाइकोसिस की समस्या एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। फिलहाल इस बीमारी के इलाज के लिए कालाजार वाला इंजेक्शन भी मददगार साबित हो रहा है और सरकार ने भी इसकी अनुमति दे दी है। वहीं आयुर्वेदिक विशेषज्ञ जलौका पद्धति से ब्लैक फंगस के इलाज की संभावना ढूंढ रहे हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर में कहीं भी एबनॉर्मल ग्रोथ में या आंखों में सूजन होने पर जलौका पद्धति का उपचार अच्छा काम करता है। आंख के ऊपर खून जमा होने पर जोंक रखा जाता है और उसके खून चूसने के बाद स्किम नॉर्मल हो जाती है। हालांकि, ब्लैक फंगस के इलाज के लिए जलौका पद्धति से इलाज की पुष्टि नहीं की गई है और ना ही सरकार के द्वारा इसकी मान्यता दे दी गई है।
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