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क्या भारत में 7,000 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है गधी का दूध? जानिए हकीकत

Sun, 13 Sep 2020 09:09 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गधी का दूध - फोटो : सोशल मीडिया
किसी को गधा कहना एक तरह से मूर्ख कहा जाना समझा जाता है। इसके अलावा कई लोग आम बोलचाल में लगातार काम करने वालों को 'गधे की तरह काम करने वाला' भी कहते हैं। भारत में गधों का इस्तेमाल बोझा ढोने में होता रहा है लेकिन मोटर वाहन के आने के बाद बीते कुछ सालों में गधों की संख्या में काफी कमी आई है। लेकिन अब गधों के बारे में ऐसी बातें सामने आ रही हैं, जिससे शायद इनकी तादाद बढ़ाने में लोगों की दिलचस्पी जागे।

ऐसा दावा किया जा रहा है कि गधी के दूध से होने वाले फायदों के वजह से यह 7,000 रुपये प्रति लीटर तक बिक सकता है। तो आइए जानते हैं कि गधी के दूध के क्या लाभ हैं और इसकी क़ीमत 7,000 रुपये प्रति लीटर तक कैसे हो सकती है?
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गधी का दूध - फोटो : सोशल मीडिया
गधी के दूध के लाभ
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन ने अपने शोध में पाया है कि बहुत से जानवरों के दूध को कम करके आंका जाता है, इनमें गधी और घोड़ी का दूध भी शामिल है। संगठन का कहना है कि गधी और घोड़ी के दूध में प्रोटीन इस तरह का है कि जिन लोगों को गाय के दूध से एलर्जी है, यह उनके लिए बहुत बेहतर है। साथ ही संगठन लिखता है कि यह दूध एक इंसानी दूध की तरह है, जिसमें प्रोटीन और वसा की मात्रा कम होती है लेकिन लैक्टॉस अधिक होता है। इसमें आगे कहा गया है कि यह जल्द ही फट जाता है, लेकिन इसका पनीर नहीं बनाया जा सकता है।

संयुक्त राष्ट्र का खाद्य एवं कृषि संगठन यह भी कहता है कि इसका उपयोग कॉस्मेटिक्स और फार्मास्युटिकल उद्योग में भी होता है। क्योंकि कोशिकाओं को ठीक करने और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के भी इसमें गुण हैं। ऐसा कहा जाता है कि प्राचीन मिस्र की महिला शासक क्लियोपैट्रा अपनी खूबसूरती बरक़रार रखने के लिए गधी के दूध में नहाया करती थीं।
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गधी का दूध - फोटो : सोशल मीडिया
NRCG के पूर्व निदेशक डॉक्टर एमएस बसु कहते हैं कि गधी के दूध के दो प्रमुख लाभ पाए जाते हैं, पहला यह महिला के दूध जैसा होता है, वहीं दूसरा इसमें एंटी-एजिंग, एंटि-ऑक्सिडेंट और रीजेनेरेटिंग कंपाउंड्स होते हैं, जो त्वचा को पोषण देने के अलावा उसे मुलायम बनाने में काम आते हैं। डॉक्टर बसु कहते हैं, "भारत में गधी के दूध पर अभी बहुत अधिक रिसर्च की जानी बाकी है। क्योंकि लोगों को इसके फायदों को लेकर जानकारी नहीं है। जबकि यूरोप में इसके बारे में लोग काफी जानते हैं, कामकाजी महिलाएं अपने नवजात बच्चों के लिए गधी के पाश्चुरिकृत दूध का इस्तेमाल कर रही हैं और अब तो अमेरिका ने भी इसकी अनुमति दे दी है। इसमें लैक्टॉज, विटामिन ए, बी-1, बी-2, बी-6, विटामिन डी और विटामिन ई भी होता है। गधी के दूध से बने साबुन, क्रीम, मॉश्चराइजर की बाजार में मांग है और आज भारत में कई महिलाएं गधी के दूध के बने इन उत्पादों का इस्तेमाल कर रही हैं।"

डॉक्टर बसु कहते हैं कि भारत में अभी गधी के दूध से कम उत्पाद बन रहे हैं लेकिन इसमें जब बढ़ोतरी होगी तो गधी के दूध की कमी होगी क्योंकि भारत में गधों की संख्या लगातार कम हो रही है।

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गधी का दूध - फोटो : सोशल मीडिया
कितना दूध देती है गधी?
एनआरसीई गधी के दूध की डेयरी के लिए गुजरात से हलारी नस्ल के गधे ला रहा है। आणंद कृषि विश्वविद्यालय के पशु आनुवंशिकी और प्रजनन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डी.एन. रांक कहते हैं कि भारत में गधों की नस्लों के बारे में पहली बार इस तरह का काम हुआ है।

वो कहते हैं, "भारत में गधों की सिर्फ स्पीति नस्ल को मान्यता थी अब गुजरात के जामनगर और द्वारका में पाए जाने वाली हराली नस्ल के गधों को भी मान्यता दी गई है। यह गधे आम गधों से थोड़े ऊंचे और घोड़ों से थोड़े छोटे और सफेद होते हैं। अब तक भारत में सड़कों पर घूमने वाले गधों की नस्ल की पहचान नहीं थी लेकिन अब दो नस्लों को पहचान मिल गई है जो अच्छी बात है।"

प्रोफेसर रांक कहते हैं कि गधों का ध्यान न रखना और उनसे बेतरतीब काम कराने से दूध नहीं मिल सकता है। वो कहते हैं कि एक गधी दिन में अधिकतम आधा लीटर दूध देती है और हर गधी का दूध उसके रख-रखाव के तरीके से घट बढ़ सकता है।
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गधी का दूध - फोटो : सोशल मीडिया
7,000 रुपये लीटर है गधी का दूध
गधी के दूध का कारोबार भारत में उस तरह से नहीं है जिस तरह से यह यूरोप और अमेरिका में शुरू हो चुका है। प्रोफेसर रांक कहते हैं कि भारत में अभी शुरुआत है, गधी का दूध महंगा जरूर है लेकिन यह अभी 7,000 रुपये प्रति लीटर तक नहीं बिक रहा है। वो कहते हैं कि विभिन्न मीडिया संस्थानों ने भी 7,000 रुपये प्रति लीटर का आंकड़ा विदेशों के हवाले से दिया है।

वहीं, डॉक्टर बसु कहते हैं कि यह अभी शुरुआत है लेकिन फार्म में रखकर गधे पालने का चलन तमिलनाडु, केरल या गुजरात में कुछ ही लोगों ने किया है और इसकी खरीद-फरोख्त अधिकतर ऑनलाइन है। सलीम अब्दुल लतीफ दादन मुंबई से वेरी रेयर ऑनलाइन डॉट कॉम नामक एक वेबसाइट चलाते हैं जो ऊंट, भेड़, गाय और गधी के दूध के साथ-साथ उससे बना घी और मिल्क पाउडर भी ऑनलाइन बेचती है। वो कहते हैं, "गधे के दूध का दाम कोई तय नहीं है और यह कोई फार्म के जरिए नहीं आता है। हम अपने लोगों से गांव से इस दूध को मंगवाते हैं। इस दूध को अधिकतर दवाई और कॉस्मेटिक्स के इस्तेमाल के लिए ही लोग लेते हैं।"

सलीम कहते हैं कि 7,000 रुपये प्रति लीटर इसका दाम तब हो सकता है जब इसे आप किसी के पास कहीं दूर भेज रहे हों क्योंकि यह जल्दी खराब हो जाता है, अगर आप इसे मुंबई में ही हाथों हाथ लें तो 5,000 रुपये प्रति लीटर में मिल जाएगा। वो कहते हैं कि सिर्फ साबुन और कॉस्मेटिक्स के उत्पाद से अलग यह पेट के बैक्टीरियल इन्फेक्शन में भी बहुत काम आता है।
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गधी का दूध - फोटो : सोशल मीडिया
गधी के दूध के प्रॉडक्ट का स्टार्टअप
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस से एमए करने के बाद दिल्ली की पूजा कौल ने तय किया कि वो गधों के जरिए मजदूरी करने वाले लोगों के लिए कुछ बेहतर करना चाहती हैं। इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र के कोल्हापुर में ऐसे मजदूरों और किसानों को इकट्ठा किया जिनके पास गधे थे। उन्होंने गधी का दूध आम लोगों को बेचने के लिए एक मॉडल तैयार किया लेकिन यह उस वक्त नाकाम रहा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने कुछ साथियों के साथ 'ऑर्गेनिको' नाम का एक स्टार्टअप शुरू किया जो गधी के दूध से स्किन केयर उत्पाद बनाकर बेचता है।

पूजा कहती हैं, "दिल्ली में इस स्टार्टअप की शुरुआत 2018 में हुई। हमने गाजियाबाद और उसके आसपास के उन मजदूरों को चिन्हित किया जो गधे रखते थे। वे इनके जरिए दिन में 300 रुपये कमाते थे लेकिन हमने उन्हें दूध बेचने के लिए राजी किया। शुरुआत में उनके घर की औरतों ने इस पर आपत्ति भी दर्ज की। उनको लगता था कि हम कोई जादू-टोने के लिए ये ले रहे हैं और उनकी गधी मर जाएगी लेकिन फिर वे दूध देने लगे। आज जब बाकी लोगों को पता चलता है कि हम गधी का दूध खरीदते हैं तो कई लोगों के फोन आते रहते हैं।"

पूजा कहती हैं कि वो 2,000 से 3,000 रुपये प्रति लीटर के दाम में दूध खरीदती हैं और फिलहाल 7,000 रुपये प्रति लीटर दूध कहीं नहीं बिक रहा है क्योंकि इसका दूध किसी फार्म के जरिए नहीं बिकता है। गधी के दूध के बने साबुन, मॉश्चराइजर और क्रीम अच्छी खासी तादाद में आपको अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइनट स्टोर पर मिल जाएंगे लेकिन आप शायद उनकी कीमत देखकर दांतों तले उंगलियां दबा लें। पूजा खुद बताती हैं कि उनके 100 ग्राम साबुन की कीमत 500 रुपये है और इन्हें खरीदने वाला एक खास वर्ग है।
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गधी का दूध - फोटो : सोशल मीडिया
भारत में गधों की स्थिति
गधी के दूध के दाम जहां हजार रुपये प्रति लीटर से ऊपर हैं वहीं गधों की तादाद सिर्फ एक लाख में सिमट चुकी है। गधों की संख्या में 2012 के मुकाबले 61 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। 2012 में पशुओं की गणना में जहां गधों की संख्या 3।2 लाख थी वो 2019 की गणना में 1।2 लाख हो चुकी है। गधों की कम होती संख्या में अगर गधी के दूध की मांग बढ़ी तो उसकी कीमत भी बहुत ऊपर जाएगी लेकिन फिलहाल बीबीसी हिंदी के फैक्ट चेक की पड़ताल में यह पता लग रहा है कि गधी के दूध की कीमत अभी 7,000 रुपये प्रति लीटर नहीं हुई है।
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