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अजब-गजब: आखिर क्या सच में भूत होते हैं? जानिए वैज्ञानिकों का जवाब

Mon, 21 Jun 2021 07:47 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
भूत होते हैं या नहीं, इसको लेकर हमेशा से विवाद रहा है। अगर आप भी भूत-प्रेत में विश्वास रखते हैं, तो ऐसा करने वाले आप इकलौते नहीं है। बता दें कि दुनिया की कई संस्कृतियों में लोग आत्माओं और मृत्यु के साथ ही दूसरी दुनिया में रहने वाले लोगों पर भरोसा करते हैं। हालांकि, भूतों पर विश्वास करना दुनिया में सबसे ज्यादा मानी जाने वाली पैरानॉर्मल एक्टिविटी में से एक है। हर दिन हजारों लोग भूतों की कहानियां पढ़ते हैं और भूतों पर बनी फिल्मों को देखते हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि भूतों के भूत, वर्तमान और भविष्य को लेकर विज्ञान का क्या मानना है?
 
साल 2019 में किए गए एक सर्वेक्षण में ये बात सामने आई थी कि अमेरिका में 46 फीसदी लोग भूतों में विश्वास करते हैं। वहीं इस सर्वे में 7 फीसदी लोगों का ये मानना था कि वो वैंपायर्स में भी विश्वास करते हैं। बता दें कि भूतों की कहानियां हर धर्म और साहित्य में मिलती है। बहुत से लोग पैरानॉर्मल बातों पर विश्वास करते हैं और मौत के बाद भी जिंदगी को मानते हैं। मृत्यु के नजदीक जाकर वापस आने के अनुभवों को शेयर करते हैं और मृत लोगों की आत्माओं से बात करते हैं। ऑक्सफोर्ड और कैंब्रिज जैसी नामी विश्वविद्यालयों में घोस्ट क्लब बने हुए हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
बता दें कि भूतों और आत्माओं पर अध्ययन के लिए 1882 में सोसाइटी फॉर फिजिकल रिसर्च बनाई गई थी। इलेनॉर सिडविक नामक महिला इस सोसाइटी की प्रेसीडेंट और इन्वेस्टिगेटर थीं। सिडविक को असली फीमेल घोस्टबस्टर कहा जाता था। अमेरिका में 1800 के अंत में भूतों पर काफी रिसर्च और काम किया गया। लेकिन बाद में ये बात सामने आई कि इसका मुख्य जांचकर्ता हैरी होडिनी एक फ्रॉड है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वैसे वैज्ञानिक आधार पर भूतों पर रिसर्च करना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि इस तरह की एक्टिविटी में अजीबोगरीब और अप्रत्याशित घटनाएं घटती हैं। जैसे - दरवाजों का खुद खुलना या बंद होना, किसी मृत रिश्तेदार का दिखना, चाभी का गायब हो जाना, सड़क पर परछाइयों का घूमना, इत्यादि। साल 2016 में समाजशास्त्री डेनिस और मिशेल वासकुल ने भूतों पर एक किताब लिखी थी, जिसका नाम था Ghostly Encounters: The Hauntings of Everyday Life। इस किताब में कई लोगों के द्वारा भूतों पर किए गए अनुभव पर कहानियां थी। इस किताब में यह बात सामने आई कि बहुत से लोग इस बात को लेकर पुख्ता नहीं थे कि उन्होंने सच में भूत ही देखा है। क्योंकि जिस तरह की चीजें उन्होंने देखी, वो परंपरागत भूत की तस्वीरों से नहीं मिलती हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ज्यादातर लोगों का ये भी मानना था कि उन्होंने ऐसी चीजें और घटनाएं महसूस की हैं, जिन्हें परिभाषित करना काफी मुश्किल है। लोग अपने हिसाब से भूतों को नाम देते हैं, जैसे- पोल्टरजिस्ट्स यानी डरने वाला भूत, रेसीड्यूल हॉटिंग्स यानी अवशिष्ट भूतिया, इंटेलिजेंट स्पिरिट्स यानी बुद्धिमान आत्माएं और शैडो पीपुल यानी परछाइयों की तरह दिखने वाले लोग। इन नामों को सुनने के बाद ऐसा लगता है कि इंसानों ने भूतों की भी कई प्रजातियां बना दी हैं। भूतों के ये नाम अलग-अलग इंसान के हिसाब से बदलते रहते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
विज्ञान के मुताबिक, जब भूतों के बारे में सोचा जाता है, तो सबसे पहले ये बात सामने आती है कि क्या ये वस्तु हैं या नहीं? क्या वो दरवाजों को खुद खोल या बंद कर सकते हैं? क्या भूत एक कमरे से कोई चीज दूसरे कमरे में फेंक सकते हैं? भूतों से जुड़े इन चीजों को लेकर कई तरह विवाद हैं। अगर तार्किक तौर पर भौतिकी के फॉर्मूले से देखें, तो सवाल ये उठता है कि अगर भूत इंसानी आत्माएं हैं तो वो कपड़ों में क्यों दिखती हैं? उनके हाथों में डंडे, टोपी और कपड़ें क्यों रहते हैं?
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
भूतों को पकड़ने या मारने वाले यानी घोस्ट हंटर्स कई तरह के तरीके अपनाते हैं। भूतों, आत्माओं की मौजूदगी का पता लगाने के लिए वो वैज्ञानिक तरीकों को भी इस्तेमाल में लाते हैं। भूतों को देखने और उनकी मौजूदगी जांचने के लिए अत्याधुनिक मशीनों का सहारा लिया जाता है। इन मशीनों में सबसे ज्यादा प्रचलित हैं गीगर काउंटर्स, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड डिटेक्टर्स, आयन डिटेक्टर्स, इंफ्रारेड कैमरा और सेंसिटिव माइक्रोफोन। लेकिन आजतक इनमें से किसी भी यंत्रो के इस्तेमाल से भूतों को सही से पकड़ा या देखा नहीं गया है। सदियों से ऐसा माना जा रहा है कि भूतों की मौजूदगी में आग की लपट नीली हो जाती है। लेकिन एलपीजी गैस में ज्यादातर नीली रोशनी निकलती है, तो क्या सिलेंडर से भूत निकलते हैं या आपके किचन में भूत रहते हैं?
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
आज के समय में वैज्ञानिकों का मानना है कि फिलहाल ऐसी कोई तकनीक नहीं है, जिसमें भूतों की मौजूदगी या उनके आकार, व्यवहार का पता किया जा सके। लेकिन सवाल ये भी उठता है कि अक्सर लोगों के फोटोग्राफ्स या वीडियो में पीछे से भागते, मुस्कुराते, झांकते, डरते भूत कैसे दिख जाते हैं? अगर भूत होते भी हैं, तो वैज्ञानिकों को इनकी जांच करने के लिए पुख्ता सबूत की जरूरत है, जो फिलहाल नहीं है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने भी भूतों की मौजूदगी पर आधुनिक फिजिक्स की एक थ्योरी दी थी, जिसे थर्मोडायनेमिक्स का पहला नियम कहते हैं। इस नियम के मुताबिक, ऊर्जा न तो बनाई जा सकती है, न ही बिगाड़ी जा सकती है। ये सिर्फ अपना स्वरूप बदल सकती है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि शरीर से निकलने वाली ऊर्जा का क्या होता है? क्या शरीर से निकलने वाली ऊर्जा अपना स्वरूप बदलती है? क्या मरने के बाद शरीर की ऊर्जा खत्म हो जाती है या फिर कहीं और चली जाती है?

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
हालांकि, आपको अल्बर्ट आइंस्टीन की किसी जटिल थ्योरी में उलझने की जरूरत नहीं है। इसका जवाब एकदम सामान्य है। आपके शरीर के मरने के बाद उसकी ऊर्जा निकलकर आसपास के पर्यावरण में मिल जाती है। शरीर उन जानवरों का खाना बन जाता है, जो इन्हें खाना चाहते हैं। क्योंकि ज्यादातर जीवों के शरीर को मरने के बाद यूं ही छोड़ दिया जाता है। ऐसे शरीर कीड़े-मकौड़े, मृत शरीर खाने वाले जीवों और पेड़-पौधों का भोजन बन जाते हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
आपको बता दें कि ऐसी कोई शारीरिक ऊर्जा नहीं है, जो मरने के बाद भी शरीर में रहे। इसे कोई भी भूत पकड़ने वाला ओझा, तांत्रिक या घोस्ट हंटर ना ही देख सकता है या ना ही रोक सकता है। ऐसे लोग खुद को सुपरनेचुरल मान लेते हैं और ऐसा ड्रामा करते हैं जैसे कि उन्होंने भूत को देखा हो या उसे पकड़ लिया हो। क्योंकि किसी शरीर से निकलने वाली ऊर्जा इस ब्रह्मांड में इतनी छोटी और कम मात्रा में होती है कि वो पकड़ में नहीं आती है। हमारे पर्यावरण में ऐसी उर्जाओं की कमी भी नहीं है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
भूत असल में क्या होते हैं, इसे लेकर अभी तक वैज्ञानिक तौर पर कुछ भी नहीं खोज गया है। इनके लिए नियंत्रित माहौल में प्रयोग करने की जरूरत है. लेकिन उन लोगों के मदद की जरुरत नहीं है जो खुद को घोस्ट हंटर, ओझा, तांत्रिक कहकर लोगों को बेवकूफ बनाते हैं। अभी तक भूतों के बारे में कुछ भी पता नहीं चलने के पीछे दो वजहें हो सकती हैं, पहला ये कि भूत होते नहीं है. ये सिर्फ लोगों के दिमाग का वहम है। दूसरा ये कि भूत होते हैं, लेकिन हमारे पास वैज्ञानिक तौर-तरीके नहीं हैं, जो इनकी मौजूदगी को पुख्ता कर सके।
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