बिहार दिव्यांग क्रिकेट टीम
- फोटो : अमर उजाला
अफगानिस्तान में न जाने का मलाल
अमित गौरव ने बताया कि चार साल पहले अफगानिस्तान में होने वाली एक दिव्यांग क्रिकेट प्रतियोगिता में न जाने का मलाल था, लेकिन इस घटना ने उन्हें और दृढ़ बना दिया। उन्होंने मन में ठान लिया कि वह बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगे और दिव्यांगों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनेंगे। इस बार उनके अथक प्रयास रंग लाए और वह बिहार की दिव्यांग क्रिकेट टीम के कप्तान बन गए।
शिक्षा और संघर्ष की कहानी
अमित की प्रारंभिक शिक्षा भगवानपुर के शुभम विकलांग केंद्र से हुई। उन्होंने मैट्रिक की पढ़ाई खरौना स्कूल से की और बाद में एलएस कॉलेज से इंटर की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने दरभंगा के पॉलिटेक्निक कॉलेज से पढ़ाई की और भोपाल से बीटेक और पटना एनआईटी से एमटेक की डिग्री हासिल की। वर्तमान में वह पीएचडी कर रहे हैं। अमित के पिता एक किसान हैं और उनके शुरुआती दौर में आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा था। खेल सामग्री के लिए पैसे नहीं होते थे, लेकिन उनकी मां चोरी-छिपे पैसे देकर उनका हौसला बढ़ाती थीं।
दिव्यांगता को वरदान मानते हैं अमित
अमित गौरव का मानना है कि दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं है, बल्कि इसे मेहनत और लगन से वरदान में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि पहले लोग दिव्यांगों को लेकर गलत धारणाएं रखते थे, लेकिन अब यह धारणा टूट रही है। अमित ने दिव्यांगों को संदेश दिया कि वे खुद को कमजोर न समझें और मेहनत से किसी भी मुकाम को हासिल कर सकते हैं।