बिहार के गया में लोगों को नोटबंदी के चलते पिंडदान करने में दिक्कत रही है। लेकिन नोटबंदी के बाद पिंडदान कराने पहुंच रहे श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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श्रद्धालुओं को हो रही है दिक्कत
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हालांकि पंडितों का कहना है कि यहां श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत नहीं हो रही है। हम बिना नोट के ही पिंडदान करा रहे हैं।
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पिंडदान से सात पीढ़ियों को मिलता है मोक्ष
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बता दें कि हिंदू मान्यताओं और वैदिक परम्परा के अनुसार पुत्र का पुत्रत्व तभी सार्थक होता है, जब वह अपने जीवित माता-पिता की सेवा करें और उनके मरणोपरांत उनकी बरसी पर तथा पितृपक्ष में उनका विधिवत श्राद्ध करें।
नोटबंदी से परेशानी
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एक पिंडदान कराने पहुंचे श्रद्धालु का कहना है कि नोटबंदी से यहां समस्या हो रही है। 500 और 1000 के पुराने नोट बंद होने और नए नोट नहीं मिलने के कारण नकदी की समस्या है। लेकिन मंदिर प्रशासन हर संभव मदद कर रहा है।
गया शहर के पूर्वी छोर पर पवित्र फल्गु नदी बहती है। माता सीता के श्राप के कारण यह नदी अन्य नदियों के तरह नहीं बह कर भूमि के अंदर बहती है इसलिए इसे 'अंत सलीला' भी कहते हैं।