कार्यक्रम में भाग लेतीं नव विवाहिताएं
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जानकारी के मुताबिक, मधुश्रावणी पर्व में विवाहिता के लिए यह एक यादगार पल होता है। नव विवाहिताएं इसे शादी के प्रथम वर्ष ही मनाती है। यह पल फिर दोबारा नहीं आता। इस दौरान नव विवाहिताएं रंगीन कपड़े पहने पायल की झुन-झुन की आवाज देते हुए हाथों में फूल-पत्ती से सजी डाली लेकर पहुंचती है और डाली सजाती हैं। इस प्रतियोगिता में सुंदर डाली वाले को पुरस्कार दिया जाता है।
आयोजन टीम के सदस्य नंदिनी सिंह ने बताया 25 जुलाई से छह अगस्त तक प्रतिदिन मिथिला हाट में यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। मिथिला की समृद्ध संस्कृति सुरक्षित रखने के लिए राज्यसभा सांसद संजय झा की दूरदृष्टि की सोच भी आयोजन में दिखती है। मिथिलांचल की संस्कृति को परंपरा के मूल में रखने की कोशिश की जा रही है। इसे मिथिला हाट विभाग द्वारा बनाया गया था। महिलाएं बढ़-चढ़ कर इसमें हिस्सा ले रही हैं।
उन्होंने बताया कि कोसी रेंज की कमिश्नर नीलम चौधरी द्वारा अन्ध्राथाढी प्रखंड के बर्स्साम गांव निवासी साक्षी झा को पुरस्कार दिया गया है। नीलम चौधरी इस कार्यक्रम को देख काफी उत्साहित दिखीं। वह मिथिला हाट घूमने के लिए पहुंचीं थी। मिथिला हाट प्रबंधन द्वारा उन्हें आमंत्रित किया गया था। यह जानकारी प्रबंध कमेटी के साकेत कुमार ने दी है। मिथिला हाट प्रतिदिन नया आयाम स्थापित कर रहा है।