पश्चिम बंगाल सरकार की अधिसूचना के अनुसार, बकाया टैक्स और लंबित यातायात जुर्माना वाले वाहनों को 1 नवंबर से प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
राज्य परिवहन विभाग ने सभी ऑटो उत्सर्जन परीक्षण केंद्रों को यह सुनिश्चित करने के बाद ही वाहनों को पीयूसीसी जारी करने का निर्देश दिया है कि सभी बकाया चुका दिए गए हैं।
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वाहन मालिकों को पीयूसी प्रमाणपत्र हासिल करने से पहले सभी बकाया टैक्स और जुर्माने का भुगतान करना होगा। नए नियम के अनुसार, यदि टैक्स और जुर्माना नहीं चुकाया जाता है, तो उस वाहन को पीयूसी प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा। इसके अलावा, राज्य सरकार ने अनिवार्य कर दिया है कि सभी वाहनों को पीयूसी प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए रियल-टाइम टेलपाइप उत्सर्जन टेस्टिंग के लिए उत्सर्जन परीक्षण केंद्रों पर उपस्थित होना होगा।
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परिवहन सचिव सौमित्र मोहन द्वारा जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि ऑटो उत्सर्जन परीक्षण केंद्रों (एईटीसी) को पीयूसीसी के लिए सिर्फ उन्हीं वाहनों पर काम करना चाहिए, जो टैक्स, जुर्माना, पेनाल्टी, लंबित ई-चालान आदि जैसी किसी भी चीज से मुक्त हैं।
इसमें कहा गया है कि यदि एईटीसी बकाया टैक्स वाले वाहनों को पीयूसीसी जारी करता है तो उसे दंडित किया जाएगा।
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अधिसूचना में कहा गया है कि पर्यावरण विभाग और पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस नई प्रणाली के लिए सहमति दे दी है। जिसके तहत "एईटीसी यह सुनिश्चित करने के बाद ही वाहनों को पीयूसीसी जारी करेगा कि सभी लंबित टैक्स बकाया चुका दिए गए हैं।"
इसमें कहा गया है कि पीयूसीसी जारी करने की नई प्रणाली 1 नवंबर से प्रभावी होगी।
राज्य सरकार ने दावा किया है कि निजी और वाणिज्यिक सहित हजारों वाहन हैं, जिन्होंने यातायात नियमों के उल्लंघन के कारण जारी किए गए जुर्माने का भुगतान नहीं किया है। नए नियम के अनुसार, इन वाहनों के मालिकों को पीयूसी प्रमाणपत्र हासिल करने से पहले बकाया जुर्माना भरना होगा।
ऐसे आरोप लगे हैं कि कई वाहन मालिक अपने वाहनों को उत्सर्जन परीक्षण केंद्रों पर ले जाए बिना ही पीयूसी प्रमाणपत्र हासिल कर लेते थे। इस तरह के भ्रष्टाचार की वजह से कई वाहन पर्यावरण में परमिटेड लिमिट से ज्यादा प्रदूषक उत्सर्जित करने के बावजूद सड़क पर दौड़ रहे हैं। साथ ही, सरकार को टैक्स के रूप में मिलने वाली बड़ी रकम का भी नुकसान हो रहा है। नए नियमों का मकसद ऐसे मुद्दों का समाधान करना है।