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PUCC: वाहन का प्रदूषण प्रमाण पत्र वैध है या अवैध? पेट्रोल पंपों पर लगा कैमरा नंबर प्लेटों को स्कैन कर बताएगा

Wed, 20 Mar 2024 06:36 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Petrol Pump - फोटो : iStock
जल्द ही, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) की वैधता के लिए पेट्रोल पंपों पर कैमरों द्वारा आपके वाहन की लाइसेंस प्लेटों को स्कैन किया जाएगा। क्योंकि दिल्ली सरकार इस मुद्दे के लिए एक डिजिटल समाधान लागू करने की योजना बना रही है।

दिल्ली परिवहन अवसंरचना विकास निगम (DTIDC) (दिल्ली ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप्मेंट कॉरपोरेशन) ने एक निविदा जारी की है और बोलीदाताओं को यह सुझाव देने के लिए आमंत्रित किया है कि क्या पेट्रोल पंप पर आने वाले वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) है, यह जांचने के लिए डिजिटल समाधान सुझाएं। परियोजना की अनुमानित लागत 6 करोड़ रुपये है।

एक अधिकारी ने कहा, "निविदादाता के पास दिल्ली शहर के भीतर प्रदूषण को कम करने के मकसद से एक डिजिटल सॉल्यूशन देने की क्षमता होनी चाहिए। इसमें पेट्रोल पंपों पर स्थित मौजूदा कैमरों के साथ इंटीग्रेट होने वाले एप्लीकेशन को लागू करना शामिल है।"
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Petrol Pump - फोटो : सोशल मीडिया
यह प्रणाली कैसे काम करेगी, यह बताते हुए अधिकारी ने कहा कि इसे पेट्रोल पंप में एंट्री करने पर वाहनों की लाइसेंस प्लेटों को स्कैन करने के लिए डिजाइन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि चयनित कंपनी को डिजिटल सॉल्यूशन को echallan.parivahan.gov.in पोर्टल के साथ इंटीग्रेट करने की जरूरत होगी। यदि किसी वाहन में एक्सपायर्ड PUCC पाया जाता है, तो पेट्रोल पंप पर अटेंडेंट वाहन मालिक को PUCC की रिन्यू कराने के लिए अवगत कराएगा। वाहन मालिक को उसी की जानकारी बोलीदाता द्वारा पेट्रोल पंप पर लगाई गई स्क्रीन के जरिए भी मिलेगी।

उन्होंने बताया, "यह सिस्टम तीन घंटे के बाद फिर से PUCC की स्थिति की जांच करेगा और PUCC अवैध होने की स्थिति में, सिस्टम echallan.parivahan.gov.in पर एक चालान जेनरेट करेगा।"
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Petrol Pump - फोटो : iStock
DTIDC द्वारा परियोजना के कार्यान्वयन के लिए तैयार किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, सिस्टम वाहन के पंजीकरण प्रमाणपत्र के डिटेल्स को उस डेटाबेस से क्रॉस-रेफरेंस करके PUCC की वैधता को सत्यापित करने में सक्षम होगा, जिस तक उसकी पहुंच होगी।

अधिकारी ने कहा कि अगर पेट्रोल पंप पर कैमरा नहीं है, तो चयनित फर्म अपने खर्च पर कैमरा लगाने की जिम्मेदारी वहन करेगी। कैमरे के अपग्रेट करने की जरूरत होगी तो यह भी कंपनी की जिम्मेदारी होगी।

उन्होंने कहा, "निविदादाता को यह सुनिश्चित करना होगा कि सिस्टम जांचे गए वाहनों की संख्या पर डेटा रिकॉर्ड करता है, उन्हें कम्पलायंट (अनुपालक) या नॉन-कम्पलायंट (गैर-अनुपालक) के रूप में बांटता है। यह जानकारी प्रोजेक्ट-इनचार्ज द्वारा मैनेज किए जा रहे डैशबोर्ड पर प्रदर्शित की जाएगी।"

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Petrol Pump - फोटो : PTI
चयनित फर्म को यह सुनिश्चित करना होगा कि सीसीटीवी कैमरों की स्थिति संतोषजनक हो और भविष्य में कवरेज की संभावना या पेट्रोल पंपों के अतिरिक्त लोकेशन जोड़ने की गुंजाइश हो।

उन्होंने कहा, "निविदा को धन की उपलब्धता के आधार पर 500 पेट्रोल पंपों तक बढ़ाया जा सकता है। डिजिटल समाधान को पहले से ही 100 पेट्रोल पंपों पर स्थापित मौजूदा सीसीटीवी कैमरों में स्थापित किया जाएगा।"

यह सिस्टम PUCC अनुपालन दरों, सिस्टम उपयोग और रिन्यू हुए PUCC की संख्या पर रिपोर्ट तैयार करेगा।
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Petrol Pump - फोटो : अमर उजाला
प्रोजेक्ट के लागू होने से पहले, कंपनी पेट्रोल पंपों के बुनियादी ढांचे का एक व्यापक सर्वेक्षण करेगी और फिर स्केलेबिलिटी, सामर्थ्य और इंटीग्रेशन में आसानी को ध्यान में रखते हुए एक उपयुक्त तकनीकी समाधान का प्रस्ताव करेगी।

शुरुआत में, कंपनी सभी स्थानों पर पेट्रोल पंपों को शामिल करते हुए एक पायलट चरण में डिजिटल सॉल्यूशन की टेस्टिंग करेगी। और साथ ही पेट्रोल पंप अटेंडेंट को नई प्रणाली और प्रक्रियाओं की ट्रेनिंग देगी।

पिछले साल, परिवहन विभाग के आंकड़ों से पता चला था कि दिल्ली में वैध पीयूसीसी के बिना लगभग 22 लाख वाहन थे और उनमें से 19 लाख दोपहिया वाहन थे।
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