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कोरोना काल में पुरानी कारों का क्रेज: आखिर क्यों खरीदें सेकंड हैंड कार, पैसे की बचत के साथ और भी हैं कई फायदे

Tue, 15 Jun 2021 02:22 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Old Car best Deal Tips - फोटो : For Refernce Only
कोरोनाकाल में पुरानी कारों की मांग तेजी से बढी है। आलम यह है कि बाजार में पुरानी कारों की सप्लाई भी कम हो गई है। लोग भी नई कारों की खरीदने की बजाय पुरानी कारों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। लॉकडाउन के चलते नई कारों की बिक्री प्रभावित हुई तो इसका सीधा असर यूज्ड कार मार्केट पर भी पड़ा है। 2014 में जहां एक नई कार पर एक पुरानी कार की बिक्री होती थी, वहीं अब कोरोना काल में पांच नई कारों पर आठ पुरानी कारों की बिक्री हो रही है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2020 में 42 लाख पुरानी कारों की बिक्री हुई थी, जो 2021 में बढ़कर 44 लाख तक पहुंच गई। वहीं सप्लाई में कमी की वजह से इस बाजार में अभी थोड़े वक्त के लिए ग्रोथ रुक गई है, उम्मीद है कि जल्द ही यह बाजार फिर से रफ्तार पकड़ेगा। ऐसे में अगर आप फर्स्ट टाइम बायर हैं तो नई कार लेने की बजाय पुरानी कार खरीदना ज्यादा बेहतर है। क्योंकि पुरानी कार न केवल आपको सस्ती पड़ती है बल्कि आप पर लोन का बोझ भी कम पड़ता है। आइए जानते हैं आपको क्यों खरीदनी चाहिए सेकंड हैंड कार...
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Used Car - फोटो : for Reference Only

सस्ती पड़ती है

पुरानी कार खरीदना का सबसे पहला फायदा यह है कि यह सस्ती पड़ती है। पुरानी कारों पर आपको अच्छी डील मिल जाती है। अगर आप नई मारुति स्विफ्ट जैसे कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपको कम से कम 5.49 लाख रुपये खर्च करने पड़ेंगे, लेकिन पुरानी स्विफ्ट आपको आधे से कम दाम में मिल जाएगी। वहीं आपको बजट ज्यादा है तो आप सुजुकी SX4 या किजाशी जैसे कार भी बेहद सस्ते में खरीद सकते हैं। कार्स24 के आंकड़ों के मुताबिक उसके 50 फीसदी से ज्यादा खरीदर फर्स्ट टाइम बायर होते हैं। मारुति ट्रू वेल्यू पर भी बिकने वाली 65 फीसदी कारें 2 लाख रुपये तक की कीमत वाली होती हैं।
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new car

नई कार को टक्कर

अपने पसंद की कार खरीदने जब आप शोरूम हो जाते हैं तो आपको उसके लिए लाखों रुपये चुकाने पड़ते हैं, लेकिन अगर वह मॉडल बाजार में ज्यादा पॉपुलर नहीं है तो हो सकता है कि बेहद कम दामों में आप उस कार के मालिक बन सकते हैं। साथ ही यूज्ड कार मार्केट में आपको ऐसी भी कारें मिल सकती हैं, जो साफ-सुथरी होती हैं यानी कम इस्तेमाल वाली होती हैं, और उनका मेंटेनेंस भी अच्छे से किया होता है। नई कार जब खरीदते हैं तो रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस जैसे खर्चे भी झेलने पड़ते हैं, लेकिन यूज्ड कार ऑनर्स को ये सब खर्च करने की जरूरत नहीं होती है।

 

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Maruti true value - फोटो : for Reference Only

घटती कीमत का उठाएं फायदा

नई कारों की कीमत तेजी से घटती है। पहले साल में कार खरीदते ही उसकी डेप्रीसिएशन वेल्यू 20 फीसदी की दर से गिरती है। दो-तीन साल में ही कीमत 50 फीसदी से नीचे आ जाती हैं। कई लग्जरी कारें ऐसी होती हैं कि जिनकी शुरुआती सालों में कीमतें तेजी से गिरती हैं। लेकिन यूज्ड कारों के मामले में ऐसा बहुत ज्यादा नहीं है। क्योंकि उनकी कीमत पहले ही गिर चुकी होती है, अगर आप पुरानी कार खरीदते हैं और दो-तीन साल बाद चला कर बेचते हैं तो आपको ज्यादा नुकसान नहीं होगा।

 
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car dent - फोटो : for Reference Only

बेफिक्र हो कर चलाएं

मारुति, ह्यूंदै कंपनियों की यूज्ड कारों की काफी मांग रहती है। इसकी वजह है कि इनका सर्विस नेटवर्क हर जगह मौजूद है और कोई भी मैकेनिक आसानी से ठीक कर देता है। इसके अलावा इनके पार्ट्स भी बाजार में आसानी से मिल जाते हैं। नई कार खरीदते हैं तो स्क्रेच आदि लगने का डर रहता है, लेकिन कार सस्ती है तो डेंट या स्क्रेच लगने का डर नहीं होता। आप बाहर से कोई अपनी पसंद की एसेसरीज या सीएनजी लगाना चाहते हैं, तो वारंटी खोने का डर नहीं रहता। बेफिक्र हो कर लगवा सकते हैं। जबकि नई कार में यह संभव नहीं है। बाहर किसी भी मैकेनिक से ठीक करवा सकते हैं बार-बार शोरूम जाकर पैसे खर्च करने का कोई लॉजिक नहीं बनता।

 
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car insurance - फोटो : For Refernce Only

कम इंश्योरेंस

नई कार पर आपको ज्यादा इंश्योरेंस देना पड़ता है। क्योंकि उनकी मार्केट प्राइस ज्यादा होती है। लेकिन यूज्ड कार के मामले में ऐसा नहीं है। आप इंश्योरेंस पर काफी पैसे बचा सकते हैं। आपको कम कीमत चुकानी पड़ती है। इसके अलावा नई कारें चोरों की निगाह में रहती हैं, पुरानी कारों पर चोर कम हाथ लगाते हैं।       

 
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Maruti True value - फोटो : For Reference Only

वारंटी और सर्टिफिकेशन

आजकल यूज्ड कार सेक्टर भी काफी ऑर्गेनाइज्ड हो गया है। कार कंपनियों के अलावा कई बड़े प्राइवेट प्लेयर्स भी इस सेक्टर में आ गए हैं। जिससे ग्राहकों में भरोसा जगा है। जैसे मारुति ट्रू वेल्यू से जो भी गाड़ियां बेची जाती हैं, वह सर्टिफाइड होती हैं और कंपनी उन पर वारंटी भी देती है। ऐसे ग्राहकों के साथ धोखा होने की गुंजाइश कम ही होती है। जब भी कोई कार बिक्री के लिए आती है जो कार कंपनियों के अपने चेक पाइंट्स होते हैं, कार को सर्टिफाइड करने के बाद ही वह बिक्री के लिए उपलब्ध होती है। कंपनियां ग्राहकों को कार की पूरी रिपोर्ट भी मुहैया कराती हैं। वहीं कुछ कंपनिया पुरानी कारों पर भी तीन साल तक की वारंटी देती हैं।
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