केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सुझाव दिया कि भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को विदेशी बाजारों से ऑटो कंपोनेंट्स के अनावश्यक आयात को रोकना चाहिए, अगर निर्यातक देश भारतीय कंपनियों को समान पहुंच नहीं दे रहा है। पीटीआई की रिपोर्ट में यह जानकारी मिली है। हालांकि, मंत्री ने यह भी कहा कि भारत में ऑटो कंपनियां अन्य देशों से गुणवत्ता वाले कंपोनेंट्स को आयात कर सकती हैं यदि वे यहां उपलब्ध नहीं हैं या निर्मित नहीं हैं।
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पीयूष गोयल
- फोटो : ANI
मंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय सरकार को ऑटोमोबाइल उद्योग के कुछ खिलाड़ियों के तरीकों पर नजर डालनी पड़ सकती है, जो घटकों के आयात के स्रोत और मूल्य निर्धारण के मामले में अपनी मूल कंपनियों द्वारा निर्देशित होते हैं। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि कुछ कंपनियां हैं जो अपनी पसंद से आयात करना पसंद करती हैं और कुछ ऐसी फर्म हैं जो खुद आयात नहीं कर सकती हैं और रिकॉर्ड पर स्वदेशीकरण की बड़ा स्तर दिखाती हैं।
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Car Plant and Factory
- फोटो : For Reference Only
गोयल की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत सरकार स्थानीय मैन्युफेक्चरिंग क्षेत्र पर जोर दे रही है। ऑटोमोबाइल उद्योग एक शीर्ष मैन्युफेक्चरिंग क्षेत्र होने के नाते विदेशी बाजारों के साथ-साथ घरेलू ऑटो पार्ट्स निर्माताओं से बड़ी संख्या में कंपोनेंट्स लेता है। हालांकि, इस इकोसिस्टम के हितधारकों की ओर से आरोप लगाए गए हैं कि भारत में कई ऑटो कंपनियां सिर्फ कंपोनेंट्स के आयात पर ध्यान केंद्रित करती हैं और स्थानीय पार्ट्स निर्माताओं को समान पहुंच नहीं देती हैं। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के वार्षिक सम्मेलन में गोयल ने यहां कहा, "जहां चीजें अनावश्यक रूप से आयात की जा रही हैं, उन देशों में भारत को समान अवसर नहीं मिल रहा है।" हालांकि, उन्होंने इन टिप्पणियों के बारे में विस्तार से नहीं बताया।
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Car Plant
- फोटो : For Reference Only
आगे बोलते हुए, मंत्री ने कहा कि भारत में कई ऑटोमोबाइल निर्माता अक्सर अपनी मूल कंपनियों से यह तय करते हैं कि कंपोनेंट आपूर्तिकर्ता कहां से खरीदेंगे, किस कीमत पर इसे हासिल किया जाएगा। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि यह कितना कानूनी है। लेकिन मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि इसमें ट्रांसफर प्राइसिंग पर सवालिया निशान है, निष्पक्ष खेल पर सवालिया निशान है। मैं ऑटो उद्योग के सभी खिलाड़ियों से इस पर आत्मनिरीक्षण करने का आग्रह करूंगा। मेरा निजी तौर पर मानना है कि किसी बिंदु पर सरकार को भी इस विषय पर अधिक विस्तार से विचार करना पड़ सकता है।"
मंत्री ने कथित तौर पर यह भी कहा कि सरकार को उन देशों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करनी पड़ सकती है जो भारतीय इस्पात कंपनियों तक पहुंच की अनुमति नहीं देते हैं लेकिन उन्हें भारत में धातु भेजने की अनुमति है। गोयल कुछ ऑटो कंपनियों द्वारा भारत से ऑटोमोटिव स्टील खरीदने के बजाय अपने मूल देश से आयात करने का जिक्र कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि उद्योग को घरेलू इकोसिस्टम पर भरोसा करना चाहिए।