कर्नाटक अपनी नई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति को अंतिम रूप दे रहा है। इसे लगभग दो हफ्ते में जारी करने का लक्ष्य है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आधिकारिक सूत्रों ने इसकी जानकारी दी है।
इस महीने की शुरुआत में जारी मसौदा नीति पर हितधारकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है। जिनमें से कुछ ने स्वीकार किया कि सब्सिडी में प्रस्तावित बढ़ोतरी काफी फायदेमंद होगी। उनका यह भी मानना है कि उपभोक्ताओं और कंपोनेंट विक्रेताओं के लिए इंसेंटिव पर ज्यादा जोर दिया जाना चाहिए था।
मसौदा नीति में कर्नाटक में 50,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ-साथ 100,000 नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य है। उद्योग विभाग ने ड्राफ्ट पब्लिक डोमेन में डाल दिया था। एक अधिकारी ने कहा कि विभाग फिलहाल सुझावों पर विचार कर रहा है।
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एक इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर निर्माता का कहना है कि मांग-पक्ष प्रोत्साहन में बढ़ोतरी से राज्य भर में ईवी अपनाने को बढ़ावा मिलेगा। उनका कहना है कि एमएसएमई और घटक विक्रेताओं को भी राज्य सरकार के स्तर पर उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं में शामिल किया जाना चाहिए।
केंद्र सरकार की फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (FAME) योजना का उद्देश्य ईवी अपनाने को प्रोत्साहित करना है। कई ईवी निर्माताओं और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाताओं ने अपने वाहनों की कीमतें कम करके योजना का लाभ उठाया है। इस साल जून में सरकार ने योजना के तहत सब्सिडी को वाहनों की कीमत के 40 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया। और इसकी वजह से निर्माताओं को अपने ईवी की कीमतें बढ़ानी पड़ीं।
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मसौदा नीति में ईवी से संबंधित सुविधाएं स्थापित करने के लिए 10,000 वर्ग फुट से ज्यादा की किराए की संपत्तियों पर तीन साल के लिए किराया सब्सिडी - किराए का 30 प्रतिशत या अधिकतम 5 रुपये प्रति वर्ग फुट प्रति माह की प्रतिपूर्ति का प्रस्ताव किया गया था। पिछली नीति में परीक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए पूंजीगत सब्सिडी को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव था।
2017 में ईवी नीति शुरू करने वाला कर्नाटक भारत में पहला था। लगभग ढाई लाख ईवी पंजीकृत होने के साथ, राज्य राष्ट्रीय स्तर पर ईवी पंजीकरण में तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। इस राज्य में कई ईवी निर्माताओं के प्लांट भी हैं।
हालांकि, मैन्युफेक्चरिंग धीरे-धीरे राज्य से दूर पड़ोसी तमिलनाडु की ओर स्थानांतरित हो रहा है। इस साल फरवरी में, एक बड़े इलेक्ट्रिक स्कूटर निर्माता ने राज्य में एक संयुक्त इलेक्ट्रिक दोपहिया, कार और लिथियम सेल गीगाफैक्ट्री स्थापित करने के लिए तमिलनाडु सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। एक अन्य प्रमुख दोपहिया ईवी निर्माता का मुख्यालय बंगलुरु में है और इसका मैन्युफेक्चरिंग प्लांट भी पड़ोसी राज्य में स्थापित है। नई नीति में कर्नाटक को ईवी विनिर्माण और अनुसंधान एवं विकास के केंद्र के रूप में फिर से स्थापित करने की उम्मीद है।