क्या बंगलूरु, दिल्ली में ट्रैफिक जाम जल्द ही अतीत की बात हो जाएगा? एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार बंगलूरु, जो ट्रैफिक जाम के मामले में वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर है, और नई दिल्ली में ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए एक व्यापक योजना पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। यह योजना German Agency for International Cooperation (जर्मन एजेंसी फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन) के सहयोग से उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) (DPIIT) द्वारा विकसित की जा रही है।
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Delhi Traffic Jam
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अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित योजना, जिसे आने वाले महीनों में लागू किया जाना है, सड़कों पर भीड़भाड़ कम करने के लिए एक मल्टी-मॉडल परिवहन बुनियादी ढांचा बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगी। इस योजना का एक प्रमुख पहलू यह है कि इसमें माल और यात्री परिवहन दोनों को मांग के रूप में माना जाएगा। वर्तमान में, शहरी क्षेत्रों में भीड़भाड़ में माल यातायात का प्रमुख योगदान होने के बावजूद, ज्यादातर शहरी नियोजन पहल मुख्य रूप से यात्री आवाजाही पर ध्यान केंद्रित करती हैं।
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रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से कहा गया, इस योजना का लाभ यह है कि इसे समान चुनौतियों का सामना करने वाले अन्य शहरों में भी लागू किया जा सकता है। अधिकारी ने कहा, स्थानीय प्रशासन और शहरी विकास मंत्रालय अपनी विशिष्ट जरूरतों के मुताबिक इन मॉडलों को अपना सकते हैं।
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Bengaluru Traffic Jam
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कई शहरों में ट्रैफिक जाम एक लगातार समस्या है, और बंगलूरु की सड़कें हाल ही में तब सुर्खियां बनीं जब एक स्टैंड-अप कॉमेडियन के शो के कारण बड़ी ट्रैफिक जाम हुई। इस समस्या से निपटने की कोशिश में, ज्यादातर शहरों ने नगरपालिका सीमा के भीतर ट्रकों और भारी-भरकम वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, इन उपायों के बावजूद, बड़े शहरों को माल और यात्री परिवहन दोनों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए संघर्ष करना पड़ा है।
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- फोटो : PTI
प्रस्तावित योजना में रेलवे स्टेशनों के पास भीड़भाड़ वाले इलाकों से यात्रियों और सामानों की आवाजाही पर भी ध्यान दिया जाएगा, जो शहरों में महत्वपूर्ण परिवहन केंद्र हैं। यह दिल्ली और बंगलूरु के सिटी मास्टर प्लान का पूरक होगा। आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय इस समय दिल्ली के लिए मास्टर प्लान-2041 (एमपीडी-2041) और क्षेत्रीय योजना-2041 (आरपी-2041) को अंतिम रूप दे रहा है। इसी तरह, बंगलूरु विकास प्राधिकरण ने बेंगलूरु-2031 के लिए एक संशोधित मास्टर प्लान प्रस्तावित किया है, जिसे अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
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- फोटो : एएनआई
बुनियादी ढांचा विकास थिंक-टैंक इन्फ्राविजन फाउंडेशन के संस्थापक विनायक चटर्जी ने भीड़भाड़ कम करने के लिए सड़कों पर कारों की संख्या कम करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए अंतिम-मील कनेक्टिविटी में निवेश करने का सुझाव दिया कि कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक परिवहन से 10 मिनट से ज्यादा दूर न हो। चटर्जी ने प्रमुख शहरों में परिवहन प्रणालियों को बढ़ाने के लिए एक एकीकृत मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की स्थापना की भी सिफारिश की।
उन्होंने इन शहरों में बुनियादी ढांचे के विकास का समर्थन करने के लिए भारत को नगरपालिका बॉन्ड का पता लगाने और पूंजी बाजार से धन जुटाने की जरूरत पर रोशनी डाली। चटर्जी ने इस बात पर जोर दिया कि शहरों के शासन और प्रशासन में व्यापक सुधार जरूरी हैं, जिसमें डबल-एंट्री बहीखाता पद्धति, यूजर-पे चार्ज और बेहतर प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन जैसे उपाय शामिल हैं।