टेस्ला जल्द ही भारत में आ सकती है? एलन मस्क के नेतृत्व वाली अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार निर्माता टेस्ला भारतीय बाजार में एंट्री करने के करीब है। क्योंकि सरकार 2-3 वर्षों के लिए 30 लाख रुपये (लगभग 36,000 डॉलर) से ज्यादा कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों पर रियायती आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) बढ़ाने के लिए नीति को अंतिम रूप दे रही है। यह कदम भारत में रोजगार बढ़ाने और स्थानीय उत्पादन के जरिए इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों को कम करने के मकसद से उठाया गया है।
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Elon Musk and PM Modi
- फोटो : X/@PMOIndia
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले से परिचित सूत्रों का हवाला देते हुए कहा गया है कि टेस्ला द्वारा भारत में इलेक्ट्रिक वाहन का कारखाना बनाने में निवेश के लिए बैंक गारंटी के बदले में कम आयात शुल्क की पेशकश की जा सकती है।
वर्तमान में, भारत 40,000 डॉलर (लगभग 33 लाख रुपये) से ज्यादा मूल्य वाली कारों पर 100 प्रतिशत आयात शुल्क और उस सीमा से नीचे की कारों पर 60 प्रतिशत आयात शुल्क लगाता है। हालांकि, टेस्ला ने यह कहकर निवेश करने की इच्छा जताई है कि अगर भारतीय सरकार संचालन के पहले दो वर्षों के दौरान आयातित इलेक्ट्रिक कारों पर 15 प्रतिशत का कम आयात शुल्क की पेशकश करती है तो वह 2 अरब डॉलर तक का निवेश करने को तैयार है।
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Tesla Model 3
- फोटो : Tesla
समय पर निवेश और स्थानीय कारखानों की स्थापना सुनिश्चित करने के लिए, सरकार बैंक गारंटी के आधार पर अस्थायी रूप से आयात शुल्क कम करने पर विचार कर रही है। बैंक गारंटी की सटीक मात्रा अभी निर्धारित नहीं की गई है। यदि कंपनियां निवेश करने के लिए निर्दिष्ट समयसीमा का पालन करने में नाकाम रहती हैं तो बैंक गारंटी भुनाई जा सकती है।
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Tesla Supercharger
- फोटो : Social Media
हालांकि टेस्ला के भारतीय बाजार में संभावित एंट्री ने दिलचस्पी जगाई है, लेकिन भारतीय ऑटो निर्माता सतर्क रुख अपना रहे हैं। बिना किसी ठोस निवेश योजना के टेस्ला को अनुचित लाभ मिलने की आशंका जताई गई है।
पिछले महीने, महिंद्रा एंड महिंद्रा (एम एंड एम) के प्रबंध निदेशक अनीश शाह ने कहा कि उनकी कंपनी ने सरकारी अधिकारियों को सूचित किया है कि वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) निर्माताओं को भारत में निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
"यह एक समान मंच होना चाहिए... भारत में निवेश करना महत्वपूर्ण है। हमारा दृष्टिकोण अनिवार्य रूप से भारत में एक मजबूत उद्योग बनाने का है, और ऐसी स्थिति में नहीं आना है जहां विनिर्माण भारत के बाहर हो, और भारत सिर्फ उत्पादों का आयातक बन जाए।" शाह को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम पर टेस्ला के किसी विशेष संदर्भ के बिना यह कहते हुए उद्धृत किया गया था।
टाटा मोटर्स और एम एंड एम जैसे घरेलू ऑटो दिग्गज पहले से ही स्थानीय रूप से ईवी का उत्पादन कर रहे हैं।