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Electric Car: FY28 तक भारत में 7% पार कर सकती है इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री, रिपोर्ट में दावा

Wed, 16 Jul 2025 05:04 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर सप्लाई चेन में खासतौर से रेयर अर्थ एलिमेंट्स से जुड़ी दिक्कतें समय पर सुलझा ली जाती हैं तो FY28 तक भारत में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 7 प्रतिशत से ज्यादा हो सकती है।
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Tata Harrier EV at Auto Expo 2025 - फोटो : Nitish Kumar/Amar Ujala
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (ईवी) का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर सप्लाई चेन में खासतौर से रेयर अर्थ एलिमेंट्स से जुड़ी दिक्कतें समय पर सुलझा ली जाती हैं तो FY28 तक भारत में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 7 प्रतिशत से ज्यादा हो सकती है। यह रिपोर्ट केयरएज एडवायजरी ने बुधवार को जारी की, उसी दिन जब अमेरिकी ईवी कंपनी टेस्ला ने आधिकारिक तौर पर भारत में अपनी एंट्री का एलान किया।

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Tata Punch EV - फोटो : Tata Motors
तेजी से बढ़ रही है इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री
पिछले कुछ वर्षों में भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में जबरदस्त उछाल आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जहां वित्त वर्ष 21 में महज 5,000 यूनिट्स बिकी थीं, वहीं वित्त वर्ष 25 तक यह आंकड़ा 1.07 लाख यूनिट्स से भी ऊपर पहुंच गया है। हालांकि, टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर सेगमेंट अब भी ईवी बाजार में सबसे बड़ा हिस्सा रखते हैं। लेकिन फोर-व्हीलर सेगमेंट भी अब पब्लिक पॉलिसी और इंडस्ट्री के बढ़ते सहयोग की वजह से तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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MG Windsor EV - फोटो : MG Motor
सरकार की नीति और नए मॉडल बनेंगे ग्रोथ के इंजन
केयरएज की सीनियर डायरेक्टर तन्वी शाह के मुताबिक, "अगर रेयर अर्थ मटीरियल्स की दिक्कत समय रहते हल हो जाती है तो भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री वित्त वर्ष 28 तक 7 प्रतिशत के पार जा सकती है। नए मॉडल्स की लॉन्चिंग, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ोतरी और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम के तहत बैटरी लोकलाइजेशन के चलते ईवी सेक्टर के लिए भारत में बहुत अच्छा मौका है।"

सरकार की तरफ से FAME III (फेम 3), एडवांस्ड बैटरियों के लिए पीएलआई स्कीम और बैटरी के जरूरी मिनरल्स पर कस्टम ड्यूटी में छूट जैसे कदम स्थानीय सप्लाई चेन को मजबूत करने और लागत घटाने में मदद कर रहे हैं।

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Hyundai Creta Electric - फोटो : Hyundai
तेजी से बढ़ रहा है चार्जिंग नेटवर्क
ईवी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी रही है, जो अब तेजी से दूर की जा रही है। 2022 में जहां भारत में 5,151 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन थे, वहीं वित्त वर्ष 25 की शुरुआत तक यह संख्या 26,000 से ज्यादा हो गई है। यह विकास दर सालाना 72 प्रतिशत से भी ज्यादा रही है।

महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडु और गुजरात जैसे राज्यों ने लोकेशन-आधारित इंसेंटिव (जमीन देने से लेकर पूंजी खर्च में सब्सिडी तक) की पहल की है। साथ ही नगर निगम भी अब रेसिडेंशियल और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में ईवी रेडी पार्किंग को जरूरी बना रहे हैं। जिससे खरीदारों की रेंज को लेकर चिंता कम हो रही है।

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Electric Car Charging - फोटो : Freepik
निजी कंपनियां और चार्जर स्टैंडर्डाइजेशन की भी बढ़ी रफ्तार
निजी चार्ज पॉइंट ऑपरेटर्स (सीपीओ) अब तेजी से अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं। और इसके लिए राज्य सरकारों और शहरी निकायों के साथ साझेदारी भी कर रहे हैं। वहीं, BEE (बीईई) और नीति आयोज जैसी राष्ट्रीय संस्थाएं चार्जर स्टैंडर्डाइजेशन और इंटरऑपरेबिलिटी पर काम कर रही हैं। ताकि चार्जिंग का अनुभव आसान हो सके।

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2025 Kia EV6 - फोटो : Kia India
बैटरी सप्लाई चेन भी हो रही मजबूत
सरकार ने अपने ताजा बजट में ईवी बैटरियों के लिए जरूरी 16 मिनरल्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी हटा दी है। जिससे लागत में और कमी आएगी और घरेलू उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 22 में जहां भारत 100 प्रतिशत लिथियम आयन सेल आयात पर निर्भर था। वहीं वित्त वर्ष 27 तक यह निर्भरता सिर्फ 20 प्रतिशत रह सकती है। क्योंकि देश में बैटरी मैन्युफैक्चरिंग में बड़े निवेश हो रहे हैं।

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Tesla Model Y - फोटो : Tesla
टेस्ला की एंट्री से और बढ़ेगा बाजार का भरोसा
मजबूत सरकारी नीतियों, तकनीकी तरक्की और टेस्ला जैसी ग्लोबल कंपनी की एंट्री के साथ भारत का ईवी बाजार अब तेजी से बढ़ने की स्थिति में पहुंच गया है। 

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