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Car Fuel Type: क्या आप अगले 10 साल के लिए कार खरीद रहे हैं? जानिए कौन सा ईंधन विकल्प आपके लिए रहेगा बेस्ट

Mon, 11 Aug 2025 04:32 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कुछ साल पहले तक जब कोई नई कार खरीदता था, तो ईंधन के विकल्प पर ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं पड़ती थी। क्योंकि उन्हें बस पेट्रोल या डीजल में से किसी एक को चुनना होता था। लेकिन अब समय बदल गया है।
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Vinfast Electric Car - फोटो : Vinfast
कुछ साल पहले तक जब कोई नई कार खरीदता था, तो ईंधन के विकल्प पर ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं पड़ती थी। क्योंकि उन्हें बस पेट्रोल या डीजल में से किसी एक को चुनना होता था। लेकिन अब समय बदल गया है। पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं कड़े उत्सर्जन नियमों ने डीजल गाड़ियों की लोकप्रियता पर असर डाला है। इसके अलावा, सीएनजी, इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड तकनीक के बढ़ते विकल्पों ने ग्राहकों को ज्यादा विकल्प दी है। लेकिन इसके साथ ही खरीदारों की उलझन भी बढ़ गई है।

नई कार खरीदते समय ईंधन के प्रकार को लेकर ये बातें ध्यान में रखना जरूरी है।

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Mahindra Thar SUV - फोटो : Mahindra
पेट्रोल कार: सस्ती और आसान, लेकिन भविष्य में चुनौतियां
अगर आप पेट्रोल कार लेना चाहते हैं, तो हर प्राइस सेगमेंट (कीमत वर्ग) में ढेर सारे विकल्प मौजूद हैं। पेट्रोल कारों की शुरुआती कीमत आमतौर पर अन्य ईंधनों की तुलना में सबसे कम होती है। नए टर्बोचार्ज्ड और डायरेक्ट इंजेक्शन इंजन तकनीक ने इनकी माइलेज को पहले से बेहतर बना दिया है। साथ ही, पेट्रोल पंप हर जगह आसानी से मिल जाने का फायदा भी है। हालांकि, पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के कारण, पेट्रोल कार मालिकों को कुछ वर्षों बाद ईंधन दक्षता में कमी का सामना करना पड़ सकता है। जिससे लंबे समय में खर्च बढ़ सकता है।

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2025 BMW 2 Series Gran Coupe - फोटो : BMW
डीजल कार: माइलेज में बेस्ट, लेकिन नियमों से घिरी
डीजल कारें बेहतर माइलेज और ज्यादा टॉर्क के लिए मशहूर हैं। लेकिन मौजूदा समय में डीजल कार लेना एक तरह से रिस्क है, खासकर दिल्ली-एनसीआर जैसे इलाकों में जहां पुराने डीजल वाहनों पर सख्त पाबंदियां हैं। इसकी वजह यह है कि डीजल इंजन पेट्रोल की तुलना में ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं। अगर आप मेट्रो शहरों से दूर रहते हैं या कार का इस्तेमाल कमर्शियल कामों के लिए करना चाहते हैं, तो डीजल कार पर विचार कर सकते हैं।

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Tata Harrier EV - फोटो : Amar Ujala
इलेक्ट्रिक वाहन: सस्ते रखरखाव का फायदा, लेकिन सीमित रेंज की दिक्कत
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतें अब धीरे-धीरे कम हो रही हैं, खासकर ईवी पर जीएसटी में कटौती के बाद। ईवी का सबसे बड़ा फायदा है प्रति किलोमीटर कम खर्च और कम रखरखाव। लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी हैं। जैसे लंबी दूरी की ड्राइव के लिए सीमित रेंज और बड़े शहरों के बाहर चार्जिंग स्टेशन की कमी। साथ ही, ईवी की शुरुआती कीमत अभी भी काफी ज्यादा है। अगर आपका ज्यादातर ड्राइविंग शहर के भीतर ही होता है, तो ईवी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। लेकिन अगर आप अक्सर हाईवे पर लंबी दूरी तय करते हैं, तो फिलहाल ईवी से बचना ही बेहतर है।

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CNG Car - फोटो : Freepik
सीएनजी कारें: सस्ता ईंधन, बेहतर माइलेज, लेकिन कुछ समझौते भी
पिछले कुछ वर्षों में भारत में पेट्रोल-सीएनजी कारों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। इसकी बड़ी वजह है पेट्रोल और डीजल की तुलना में सीएनजी का सस्ता होना, ज्यादा माइलेज देना और कम प्रदूषण फैलाना। बाजार में सीएनजी कारों की बढ़ती संख्या और सीएनजी फिलिंग स्टेशन के नेटवर्क का विस्तार भी इस ईंधन को तेजी से लोकप्रिय बना रहा है।

हालांकि, सीएनजी कार के साथ कुछ समझौते भी करने पड़ते हैं। सबसे पहले, सीएनजी टैंक की वजह से बूट स्पेस कम हो जाता है। इसके अलावा, पेट्रोल कारों की तुलना में इसकी पावर थोड़ी कम होती है। जिससे एक्सीलरेशन और हाईवे ड्राइविंग में फर्क महसूस हो सकता है।

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Maruti Suzuki Grand Vitara - फोटो : Maruti Suzuki
हाइब्रिड कारें: ICE और EV के बीच की कड़ी
भारत में हाइब्रिड कारें कई तरह की मिलती हैं - माइल्ड हाइब्रिड, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और प्लग-इन हाइब्रिड। यह तकनीक इंटरनल कंब्शन इंजन (ICE) और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) के बीच एक पुल की तरह है। खासकर स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारें पेट्रोल विकल्पों के मुकाबले करीब 10 किलोमीटर प्रति लीटर ज्यादा माइलेज देती हैं।

इनकी पावर भी पारंपरिक इंजन वाली कारों से बेहतर होती है और प्रदूषण कम फैलाती हैं। हालांकि, इनका एक बड़ा नुकसान यह है कि इनकी शुरुआती कीमत काफी ज्यादा होती है। जो कई खरीदारों के लिए सोचने वाली बात बन जाती है।

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