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Vehicle GST: क्या है लग्जरी और आम आदमी का वाहन? कारों और मोटरसाइकिलों पर जीएसटी काउंसिल करेगी फैसला

Wed, 03 Sep 2025 04:07 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

GST काउंसिल कार और बाइक पर टैक्स दरें घटाने और लग्जरी व मास-मार्केट की नई परिभाषा तय करने जा रही है। जानिए मारुति, टाटा, महिंद्रा, टेस्ला और रॉयल एनफील्ड जैसी कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा।

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कार शोरूम - फोटो : AI
भारत में गाड़ियां और बाइक खरीदने का तरीका बदलने वाला है। जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में ये तय होगा कि ऑटो सेक्टर में लग्जरी किसे माना जाएगा और आम जनता (मास-मार्केट) का प्रोडक्ट क्या होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में होने वाला यह फैसला दुनिया के तीसरे सबसे बड़े ऑटोमोबाइल बाजार के लिए बेहद अहम है।

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Maruti Suzuki Dzire - फोटो : Amar Sharma
कारों पर GST का असर
अभी कारों पर 5%, 12%, 18% और 28% की चार स्लैब वाली जीएसटी दरें लगती हैं। लेकिन अब इसे घटाकर सिर्फ दो स्लैब (5% और 18%) करने की तैयारी है। इससे कारों और बाइकों पर जीएसटी करीब 10% कम होकर 18% तक आ सकता है।

छोटी पेट्रोल कारें, जिनका इंजन 1,200 cc तक है, उन पर टैक्स 28% से घटकर 18% हो सकता है। यही फायदा छोटी हाइब्रिड कारों को भी मिलने की संभावना है। इससे मारुति और टोयोटा को बड़ा फायदा होगा। जबकि टाटा और महिंद्रा को नुकसान क्योंकि उनका फोकस फिलहाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर है।

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Tesla Model Y Performance - फोटो : Tesla
इलेक्ट्रिक कारों पर GST का असर
लेकिन दूसरी तरफ, 20-40 लाख की इलेक्ट्रिक कारों पर टैक्स 5% से बढ़ाकर 18% करने की चर्चा है। अगर ऐसा हुआ तो यह टेस्ला और BYD जैसी लग्जरी ईवी कंपनियों के लिए झटका साबित होगा।

टेस्ला, जो दुनिया भर में हर चार घंटे में इतनी कारें बेच देती है जितनी उसने भारत में अब तक बुकिंग हासिल की हैं (600), अब चीन से सिर्फ 350-500 कारें भारत भेजने की योजना बना रही है।

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Bike - फोटो : Hero MotoCorp
बाइकों पर GST का असर
दो-पहिया उद्योग लंबे समय से टैक्स कम करने की मांग कर रहा था। अब संभावना है कि बाइक पर भी जीएसटी 28% से घटाकर 18% किया जाए। इससे हीरो मोटोकॉर्प और होंडा मोटरसाइकिल जैसे दिग्गजों को सीधा फायदा होगा, क्योंकि उनके कम्यूटर बाइक की बिक्री पिछले कुछ समय से कमजोर हो रही है।

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Royal Enfield Classic 650 Twin - फोटो : Royal Enfield
लेकिन सरकार यहां भी लग्जरी और मास-मार्केट को अलग-अलग परिभाषित कर सकती है। 350 cc से ऊपर की बाइकों पर 40% तक टैक्स लगाने का प्रस्ताव है। इसका मतलब है कि रॉयल एनफील्ड और बजाज ऑटो जैसी कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है, जो इस सेगमेंट में बड़ा निवेश कर चुकी हैं।

रॉयल एनफील्ड के चेयरमैन सिद्धार्थ लाल और बजाज ऑटो के चेयरमैन राजीव बजाज दोनों ही चाहते हैं कि सभी बाइकों पर समान 18% जीएसटी हो। उनका कहना है कि ज्यादा टैक्स से भारतीय ब्रांड्स की ग्लोबल पकड़ कमजोर पड़ सकती है।

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Hyundai Exter - फोटो : Hyundai
सरकार की कमाई पर असर
अगर छोटी कारों पर जीएसटी घटाकर 18% किया गया तो सरकार को हर साल 25,000-30,000 करोड़ रुपये का घाटा हो सकता है। उदाहरण के लिए, 6 लाख की कार पर अभी सरकार को 1.68 लाख रुपये जीएसटी मिलता है। लेकिन नए टैक्स में ये घटकर 1.08 लाख रुपये रह जाएगा।

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Mercedes-Benz EQA and EQB Electric SUV - फोटो : Mercedes-Benz
लग्जरी कारों पर अगर टैक्स बढ़ाया भी जाता है, तो उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि उनकी बाजार हिस्सेदारी सिर्फ 1-2% है। वहीं, मोटरसाइकिलों पर टैक्स कम करने से सरकार को 18,000-20,000 करोड़ रुपये की कमी हो सकती है। जबकि 350 cc से ऊपर की बाइकों पर टैक्स बढ़ाने से सिर्फ 1,500-2,000 करोड़ रुपये की भरपाई होगी।

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कार शोरुम पर खरीदारों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
GST घटाने के पीछे तर्क
सरकार को उम्मीद है कि अगर गाड़ियां और बाइक सस्ती होंगी तो बिक्री बढ़ेगी और ज्यादा बिक्री से टैक्स घाटे की भरपाई हो जाएगी। आने वाले त्योहारों के सीजन में यह ऑटो सेक्टर को बड़ा बढ़ावा दे सकता है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर जीडीपी में सिर्फ 0.20% से 0.30% तक की भी बढ़ोतरी होती है तो टैक्स में होने वाला नुकसान आसानी से पूरा हो जाएगा। 

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