सांकेतिक
- फोटो : Unsplash
क्या है पूरा मामला?
कोर्ट का फैसला उस केस में आया है, जहां अम्बेडकर नगर के रहने वाले राजेश तिवारी ने साल 2003 में महिंद्रा मार्शल गाड़ी को फाइनेंस पर खरीदा था। तिवारी ने इस कार के लिए एक लाख रुपये का डाउनपेमेंट किया था और बाकी की शेष राशि को लोन पर कर दिया।
इस गाड़ी पर उन्हें हर महीने 12,531 रुपये का किस्त भरना था। ग्राहक ने शुरुआत के सात महीनों तक गाड़ी की किस्त भरी लेकिन इसके बार की किस्त को वो भर नहीं पाए। पांच महीने तक फाइनेंसिंग कंपनी ने इंतजार किया, लेकिन फिर भी जब तिवारी किस्त नहीं भर पाए तब कंपनी ने उनकी कार उठवा ली।