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Mileage Tips: इंजन ऑयल से बढ़ता है कार या बाइक की माइलेज, ऐसे चुनें सही ऑयल

Wed, 30 Jun 2021 06:17 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इंजन ऑयल - फोटो : For Representation Only
कार या मोटरसाइकिल की नियमित तौर पर सर्विसिंग कराने से उसकी उम्र बढ़ती है। जब भी आप कार या बाइक की सर्विस कराने जाते हैं तो सबसे पहले उसका इंजन ऑयल बदला जाता है। यह इंजन ऑयल ही है, जो इंजन को चुस्त-दुरुस्त रखता है और इंजन की परफॉरमेंस बढ़ाने के साथ उसकी लाइफ भी बढ़ाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत इंजन ऑयल आपकी कार या बाइक के माइलेज को घटा सकता है। बाजार में कई तरह के इंजन ऑयल मिलते हैं और उनका अलग-अलग ग्रेड होता है। हर इंजन के लिए अलग-अलग तरह के इंजन ऑयल की जरूरत होती है और अपनी मर्जी से कोई इंजन ऑयल नहीं चुन सकते हैं। यहां हम आपको बताएंगे कि कैसे करें सही ऑयल की पहचान। 

एक अच्छा इंजन ऑयल आसानी से लीक नहीं होता 
एक अच्छा इंजन ऑयल आपकी इंजन सील और गैसकेट्स को दुरुस्त रखता है और आसानी से लीक नहीं होता। बाजार में आमतौर पर तीन तरह के इंजन ऑयल इस्तेमाल होते हैं - मिनरल ऑयल, सेमी-सिंथेटिक ऑयल और फुली सिंथेटिक ऑयल। लेकिन इन तीनों का ग्रेड अलग-अलग है। हर इंजन के लिए अलग-अलग इंजन ऑयल इस्तेमाल करना होता है। इसकी डिटेलस आप अपनी कार कंपनी की डीलरशिप से ले सकते हैं। इसके अलावा गाड़ी के साथ आने वाली बुकलेट में भी इंजन ऑयल के ग्रेड के बारे में जानकारी होती है। अब आपको बताते हैं तीन तरह के इंजन ऑयल के बारे में। 
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इंजन ऑयल - फोटो : For Representation Only

मिनरल इंजन ऑयल 
दरअसल ये एक परिष्कृत पेट्रोलियम ऑयल होता है और विस्तृत तापमान में काम कर सकता है। बाजार में आने वाली ज्यादातर कारों और बाइक्स में मिनरल इंजन ऑयल का इस्तेमाल होता है। यह न सिर्फ बेहद सस्ते होते हैं बल्कि फ्रिक्शन से पैदा होने वाली गर्मी से सुरक्षा के लिए पर्याप्त लुब्रिकेशन और प्रोटेक्शन भी देते हैं। वहीं यह सामान्य तापमान में बेहतर काम करते हैं, अगर तापमान ज्यादा ठंडा या ज्यादा गर्म हो तो यह बेअसर हो जाते हैं। यह सेमी-सिंथेटिक या फुली सिंथेटिक ऑयल की तुलना में सस्ता होता है। 

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इंजन ऑयल - फोटो : For Representation Only

सेमी-सिंथेटिक ऑयल 
जैसा कि इसके नाम से साफ है कि यह मिनरल और फुली-सिंथेटिक के बीच का इंजन ऑयल है, जिसमें सिंथेटिक ऑयल की थोड़ी मात्रा मिनरल ऑयल में मिलाई जाती है। जिससे कीमत में बिना कोई बढ़ोतरी हुए ऑयल की गुणवत्ता बढ़ जाती है। यह ऑयल कम तापमान में भी बेहतरीन चिपचिपाहट देता है, वहीं उच्च तापमान में अच्छा प्रतिरोध देता है। वहीं सेमी-सिंथेटिक इंजन ऑयल मिनरल ऑयल से अच्छा होता है, लेकिन फुली सिंथेटिक ऑयल से बेहतर नहीं है।

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इंजन ऑयल - फोटो : For Representation Only

फुली-सिंथेटिक ऑयल 
फुली-सिंथेटिक इंजन ऑयल्स को बेहतरीन लुब्रिकेशन के लिए जाना जाता है, वहीं इनकी पररफॉरमेंस भी शानदार होती है। वहीं फुली सिंथेटिक इंजन ऑयल वाले वाहन ज्यादा माइलेज भी देते हैं। जहां मिनरल ऑयल को मूल अणुओं में तोड़ कर उसकी अशुद्धियों को बाहर निकाल दिया जाता है। वहीं फुली सिंथेटिक ऑयल में खास अणु होते हैं, जो बेहतर लुब्रिकेशन देते हैं। यह ऑयल अधिकतम और न्यूनतम तापमान पर भी बेहतरीन कार्य करता है। लेकिन इस ऑयल को बनाना महंगा पड़ता है, जिसके चलते ये बाकी दोनों से महंगा है। 

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इंजन ऑयल - फोटो : For Representation Only
ऐसे लगाएं पता 
इसके अलावा बाजार में कुछ और तरह के भी इंजन ऑयल मिलते हैं, जिनकी विस्कोसिटी (चिपचिपाहट) ग्रेड से उनकी परफॉरमेंस के बारे में पता लगाया जा सकता है। कम विस्कोसिटी यानी कि यह पतला होगा और इंजन में तेजी से जगह बना सकता है। वहीं ज्यादा विस्कोसिटी का मतलब है ज्यादा मोटा या भारी, वहीं यह इंजन में धीरे-धीरे जगह बनाएगा। वहीं इसमें इंजन के पुर्जो की सुरक्षा के लिए एक खास सुरक्षा लेयर भी होती है। 
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