ज्योतिष में सभी ग्रहों की अपनी-अपनी भूमिका होती है। इन सभी ग्रहों का जातकों की कुंडली में व्यापक प्रभाव देखने को तो मिलता ही है साथ ही वास्तु पर भी प्रभाव पड़ता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार प्रत्येक दिशा के देवता भी अलग-अलग होते हैं। आइए जानते हैं सभी 9 ग्रहों का वास्तु शास्त्र से क्या संबंध है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
सूर्य-
वास्तु शास्त्र के अनुसार पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य ग्रह है। ज्योतिष में सूर्य ऐश्वर्य और तेजस्व प्रदान करने वाला ग्रह माना गया है। इस कारण से पूर्व दिशा को दोषमुक्त होना चाहिए।
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चन्द्रमा
चंद्रमा मन का कारक ग्रह होता है। चंद्रमा शांत मन और भाग्य का अधिपति ग्रह है। वायव्य दिशा का स्वामी चन्द्रमा है। इस दिशा में भोजनकक्ष और अतिथि गृह का होना शुभ होता है।
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बुध ग्रह
- फोटो : social media
बुध-
ज्योतिष में बुध ग्रह को सम्पन्नता, वाकचातुर्य, बुद्धिमानी और करियर का प्रतिनिधि करता है। बुध ग्रह की दिशा उत्तर दिशा मानी जाती है और इस दिशा के देवता कुबेर होते हैं। वास्तुशास्त्र के अनुसार इस दिशा में अध्ययन कक्ष, तिजोरी और पुस्तकालय शुभ माने गए हैं ।
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गुरु-
गुरु ग्रह की गिनती शुभ ग्रहों में होती है। गुरु तेज और बौद्धिक क्षमता के कारक ग्रह माने गए है। गुरु उत्तर-पूर्व या ईशान कोण का स्वामी ग्रह है। इस दिशा के देवता भगवान विष्णु हैं। इस दिशा में पूजा स्थल अत्यंत शुभकारी माना गया है।
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शुक्र ग्रह (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
शुक्र
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्र ग्रह को संपन्नता और वैभव का प्रतीक माना जाता है। वास्तु शास्त्र में शुक्र को आग्नेय कोण के अधिपति ग्रह माना जाता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार इस दिशा में रसोई और बिजली से जुड़े हुए सामान रखना शुभ होता है।
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mars
मंगल-
ज्योतिष में मंगल ग्रह को साहस का प्रतीक ग्रह माना गया है। दक्षिण दिशा मंगल ग्रह के अधीन होती है और इस दिशा के देवता यम हैं। ऐसे में इस दिशा में शयनकक्ष और स्टोर रूम होना चाहिए।
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shani dev
शनि-
ज्योतिष में शनि ग्रह को कर्म और न्याय के देवता माने गए है। वास्तु शास्त्र में पश्चिम दिशा को शनि की दिशा कहा जाता है। पश्चिम दिशा लाभ एवं प्रसन्नता की दिशा है। इस दिशा में ड्राइंगरूम,बेडरूम,पुस्तकालय होना शुभ होता है।
राहु
दक्षिण पश्चिम दिशा या नैऋत्य कोण का स्वामी राहु ग्रह है एवं इस दिशा की देवी आसुरी शक्ति वाली है। वास्तु में इस दिशा को सबसे अधिक भारी रखना शुभ होता है। घर में भूलकर भी इस दिशा को हल्की एवं खुली नहीं रखें। इस दिशा में बैडरूम,ऑफिस,बाथरूम या स्टोर रूम बनाना लाभदायक रहता है।