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Navratri 2020 Vastu Tips: नवरात्रि के नौ दिन और वास्तु के नौ उपाय

Thu, 15 Oct 2020 07:49 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद
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navratri 2020: जिन भवनों में वास्तुदोष हो वहां सुख-शांति के लिए देवी माँ की पूजा से घर के वास्तुदोषों का शमन होता है
Navratri 2020 : शारदीय नवरात्रि स्थापना से लेकर दशहरा तक का समय अत्यंत पवित्र और उत्साह से परिपूर्ण होता है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा बड़े ही चाव और भक्ति भाव से की जाती है। जगह-जगह माँ शेरावाली के पांडाल सजते है एवं श्रीराम की कथाओं का आयोजन बड़े सुंदर तरीके से किया जाता हैं। नवरात्रि में माँ दुर्गा की कृपा पाने के लिए हम उपवास, पूजा, अनुष्ठान आदि करते है जिससे जीवन में भय ,विघ्न और शत्रुओं का नाश होकर सुख-समृद्धि आती है। जिन भवनों में वास्तुदोष हो वहां सुख-शांति के लिए देवी माँ की पूजा से घर के वास्तुदोषों का शमन होता है और वहां उपस्थित सभी नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं।
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शारदीय नवरात्रि 2020
वास्तु में मान्यता है कि नवरात्रि के दिनों में कन्याओं को देवी का रूप मानकर आदर-सत्कार करने एवं भोजन कराने से घर का वास्तुदोष दूर होता है और सुख-समृद्धि,ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। मनुष्य प्रकृति रूपी कन्याओं का पूजन करके साक्षात भगवती की कृपा पा सकते हैं। इन कन्याओं में मां दुर्गा का वास रहता है। कन्या पूजन नवरात्रि पर्व के किसी भी दिन या कभी भी कर सकते हैं लेकिन अष्टमी और नवमी को कन्या पूजन के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
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नवरात्रि 2020
जहाँ माता का दरबार सजा रहे है वह जगह साफ़-सुथरी हो,धूल-मिट्टी,मकड़ी के जाले नहीं हो,ये नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते है। पूजन कक्ष की दीवारें हल्के पीले, गुलाबी ,हरे, बैंगनी जैसे आध्यात्मिक रंग की हो तो अच्छा है,क्यों की ये रंग सकारात्मक ऊर्जा के स्तर को बढ़ाते है।काले,नीले और भूरे जैसे तामसिक रंगों का प्रयोग पूजा कक्ष की दीवारों पर नहीं होना चाहिए।

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नवरात्रि का महत्व - फोटो : gettyimages
वास्तुविज्ञान के अनुसार मानसिक स्पष्टता और प्रज्ञा का दिशा क्षेत्र ईशान कोण यानि कि उत्तर-पूर्व दिशा को पूजा-पाठ के लिए श्रेष्ठ माना गया है। यहाँ माता रानी की पूजा करने से उपासक को पूजा का पूर्ण फल  मिलता है,घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहेगा।
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navratri 2020
धर्मशास्त्रों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश में सभी ग्रह नक्षत्रों एवं तीर्थों का वास होता है। इनके आलावा ब्रह्मा, विष्णु,रूद्र,सभी नदियों,सागरों,सरोवरों एवं तेतीस कोटि देवी-देवता कलश में विराजमान होते हैं। वास्तु के अनुसार ईशान कोण(उत्तर-पूर्व)जल एवं ईश्वर का स्थान माना गया है और यहां सर्वाधिक सकारात्मक ऊर्जा रहती है। इस दिशा में कलश रखने से जल तत्व से जुड़े वास्तुदोष दूर होकर सुख-समृद्धि आती है।
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Happy Navratri 2020 - फोटो : अमर उजाला
देवी माँ का क्षेत्र दक्षिण और दक्षिण पूर्व दिशा माना गया है इसलिए यह ध्यान रहे कि पूजा करते वक्त आराधक का मुख दक्षिण या पूर्व में ही रहे। वास्तु में शक्ति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाने वाली पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से हमारी प्रज्ञा जागृत होती है एवं दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से आराधक को मानसिक शांति अनुभव होती है,घर के क्लेशों का नाश होता है।
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Happy Navratri 2020 - फोटो : अमर उजाला
नवरात्रि में दुर्गा माँ की पूजा-अनुष्ठान के दौरान पूजन कक्ष एवं मुख्य द्वार पर आम या अशोक के हरे-हरे पत्तों की बंदनवार लगाने से घर में नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं करती,ध्यान रहे बंदनवार सूखने पर तुरंत दूसरी बाँध दें।

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navratri 2020
मातारानी की पूजा करते समय अखंड दीप को पूजा स्थल के आग्नेय यानि दक्षिण-पूर्व में रखना शुभ होता है क्योंकि यह दिशा अग्नितत्व का प्रतिनिधित्व करती है, ऐसा करने से आग्नेय दिशा के वास्तुदोष दूर होकर घर में रुका हुआ धन प्राप्त होता है। इसके अलावा आग्नेय कोण में अखंड ज्योति या दीपक रखने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है तथा घर में सुख-समृद्धि का निवास होता है।

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navratri 2020
नवरात्रि के दिनों में संध्याकाल के समय पूजन स्थल पर शुद्ध घी का दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है,बुरी शक्तियां दूर भागती हैं घर के सदस्यों को प्रसिद्धि मिलती है व रोग एवं क्लेश दूर होते है।
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नवरात्रि में गृह प्रवेश
पूजा कक्ष के दरवाज़े पर हल्दी,सिन्दूर या रोली से दोनों तरफ स्वास्तिक बना देने से माँ की कृपा प्राप्त होती है,वास्तु दोषों से उत्पंन बुरे प्रभाव दूर होते हैं। वास्तुशास्त्र के अनुसार शंख ध्वनि व घंटानाद करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और आस-पास का वातावरण शुद्ध और पवित्र होकर मन-मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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