वैजयंती माला का प्राचीन धमर्ग्रंथों में उल्लेख किया गया है। यह माला वैजयंती के बीजों से बनती है। इसका उपयोग पूजापाठ के बाद इसको सिद्ध करके किया जाता है। वैजयंती माला के संबंध में प्राचीन ग्रन्थों बहुत अधिक महिमा का वर्णन किया गया है। वैजयंती के फूलों की माला भगवान सत्यनारायण,भगवान विष्णु जी और लक्ष्मी जी के गले में सुशोभित होती है, और इसके उपरांत मान्यता है कि इस माला को माता पृथ्वी ने श्रीकृष्ण को सृष्टि की रक्षा के लिए युद्ध के उपरांत श्रद्धा और प्रेम से उन्हें भेंट में दी थी, और तभी से श्रीकृष्ण को यह माला अत्यन्त प्रिय है। वैजयंती की माला वैजयंती के बीजों से बनती है। इसे सभी प्रकार के बड़े अनुष्ठानों से लेकर सामान्य पूजा-पाठ, यज्ञ, हवन, तंत्र व सात्विक साधनों में प्रयोग किया जाता है। एक मान्यता अनुसार भगवान राम ने माता वैष्णोदेवी को अगले जन्म में उन्हें विवाह का वचन देते हुए अपने गले से उतारकर उपहार स्वरूप वैजयंती माला उन्हें भेंट की थी और तभी से उनसे आगामी जन्म में अपने नए अवतार के रूप में जन्म ले कर उनसे विवाह करने के वचन के रूप में अपने गले से उतार कर उपहार स्वरूप भेंट की थी तभी से मां वैष्णो को यह माला और पुष्प काफी प्रिय हैं।