वैभव लक्ष्मी के व्रत की विधि
शुक्रवार के दिन महिलाएं को ब्रह्ममुहूर्त में उठकर, सभी नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नान करें।
मंदिर और पूरे घर की की साफ-सफाई कर लें। इसके बाद मां लक्ष्मी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
धूप दीप प्रज्जवलित करें और पूरे दिन फलाहार कर आप व्रत करें।
संध्या के समय पुनः स्नान करें और पूजा करने के लिए पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके बैठ जाएं।
इसके बाद चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर वैभव लक्ष्मी की तस्वीर या प्रतिमा विराजमान करें।
मां लक्ष्मी की तस्वीर के पास में ही श्रीयंत्र भी स्थापित करें।
अब मां लक्ष्मी के समक्ष एक उंजरी (दोनों हाथों की हथेलियों को जोड़कर बनने वाला स्थान) चावल लेकर उसकी ढेरी बनाएं।
इसके बाद तांबे के लोटे में जल भरकर चावल के ढेर पर रख दें। लोटे के ऊपर एक छोटी कटोरी रखें। इसमें सोने या चांदी का कोई आभूषण रख दें। यदि आभूषण न हो तो एक सिक्का रख सकते हैं।
वैभव लक्ष्मी के समक्ष गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और उन्हें लाल चंदन, गंध, लाल वस्त्र, लाल फूल अर्पित करें।
चावल और गाय से दूध से खीर बनाकर मां वैभव लक्ष्मी को भोग अर्पित करें या सफेद मिठाई का भोग भी लगा सकते हैं।
मां लक्ष्मी की पूजा करते समय श्रीयंत्र की भी पूजा करें।
वैभव लक्ष्मी व्रत की कथा पढ़ें। कथा संपन्न होने पर मां की आरती करें।