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Shani Vakri 2021: 23 मई से शनिदेव चलेंगे उल्टी चाल, इन तीन राशियों पर होगा सबसे ज्यादा असर

Sat, 24 Apr 2021 07:30 AM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शनि वक्री 2021 - फोटो : अमर उजाला
न्याय के देवता शनि महाराज 23 मई 2021 को मकर राशि में ही वक्री होने जा रहे हैं। इसके बाद 11 अक्तूबर 2021 तक ये वक्री अवस्था में रहेंगे फिर मार्गी होकर गोचर करेंगे। शनि की उल्टी चाल का प्रभाव तीन राशियों पर सर्वाधिक प्रभाव रूप से पड़ सकता है। शनि वक्री के दौरान इन तीन राशियों को सावधान रहने की आवश्यकता होगी। 
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शनि वक्री का धनु, मकर और कुंभ इन तीन राशियों पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ सकता है। - फोटो : अमर उजाला
इन तीन राशियों पर पड़ेगा सर्वाधिक प्रभाव
शनि वक्री का धनु, मकर और कुंभ इन तीन राशियों पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ सकता है। इनमें मकर और कुंभ शनि की ही राशियां हैं जबकि धनु के मालिक देवगुरु बृहस्पति हैं। वर्तमान में इन तीनों राशियों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। ऐसे में इनके ऊपर वक्री शनि का और अधिक प्रभाव पड़ेगा।
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शनि वक्री 2021 - फोटो : अमर उजाला
इन दो राशियों पर शनि ढैय्या का प्रभाव
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, वर्तमान में मिथुन और तुला राशि के ऊपर शनि ढैय्या चल रही है। इन दोनों राशियों पर ये प्रभाव 2022 तक देखने को मिलेगा। शनि वक्री के दौरान इन दोनों राशियों के जातकों को अपने जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। इस अवधि में सफलता पाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।

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शनि वक्री 2021 - फोटो : अमर उजाला
वक्री शनि का प्रभाव 
मेष राशि में शनि देव नीच के हो जाते हैं। जबकि तुला राशि में ये उच्च के माने जाते हैं। शनि जब भी सप्तम भाव में होते हैं वे अशुभ फलकारी होते हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यदि आपकी जन्म कुंडली में वक्री शनि शुभ स्थिति में हैं तो आपको इस अवधि में शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। वहीं अशुभ होने पर आपके कार्यों में तमाम प्रकार की बाधाएं आएंगी। अशुभ शनि जातकों को शारीरिक और मानसिक कष्ट देते हैं। 
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शनि वक्री 2021 - फोटो : self
शनि के बुरे प्रभाव से ऐसे बचें
  • शमी के वृक्ष की जड़ को काले कपड़े में पिरोकर शनिवार की शाम दाहिने हाथ में बांधे तथा ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम: मंत्र का तीन माला जप करें।
  • शनि ग्रह से शुभ फल पाने के लिए शिव की उपासना एक सिद्ध उपाय है। नियमपूर्वक शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करने से शनि के प्रकोप का भय जाता रहता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं। इस उपाय से शनि द्वारा मिलने वाला नकारात्मक परिणाम समाप्त हो जाता है।
  • भगवान शिव की तरह उनके अंशावतार बजरंग बली की साधना से भी शनि से जुड़ी दिक्कतें दूर हो जाती हैं। कुंडली में शनि से जुड़े दोषों को दूर करने के लिए प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करें और हनुमान जी के मंदिर में जाकर अपनी क्षमता के अनुसार कुछ मीठा प्रसाद चढ़ाएं।
  • शमी का वृक्ष घर में लगाएं और नियमित रूप से उसकी पूजा करें। इससे न सिर्फ आपके घर का वास्तुदोष दूर होगा बल्कि शनिदेव की कृपा भी बनी रहेगी। इसी तरह काले कपड़े में शमी वृक्ष की जड़ को बांधकर अपनी दांयी बाजू पर धारण करने पर शनिदेव आपका बुरा नहीं करेंगे बल्कि उन्नति में सहायक होंगे।
  • शनिवार के दिन शनि महाराज को नीले रंग का अपराजिता फूल चढ़ाएं और काले रंग की बाती और तिल के तेल से दीप जलाएं। साथ ही शनिवार के दिन महाराज दशरथ का लिखा शनि स्तोत्र पढ़ें। शनिवार या अमावस्या के दिन सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर शनिदेव का ध्यान करें। फिर एक दीपक में सरसों का तेल डालकर जलाएं।
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