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अक्टूबर तक शनि चलेंगे वक्री चाल, इन उपायों और मंत्र जाप से मिलेगी शनि के बुरे प्रभावों से मुक्ति

Wed, 26 May 2021 10:43 AM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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shani dev
जिस तरह से प्रत्येक ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में भ्रमण करता है उसी प्रकार शनि भी एक राशि से दूसरी राशि में भ्रमण करते हैं। शनि वक्री और मार्गी दोनों होते हैं। इस समय शनिदेव मकर राशि में वक्री चाल चल रहे हैं। शनिदेव 23 मई से मकर राशि में वक्री हुए हैं जो 11 अक्टूबर तक वक्री रहेंगे। इस दौरान कई राशि को लोगों पर बुरा प्रभाव पड़ने की संभावना है। जिन राशियों पर इस समय शनि की दशा, महादशा, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या चल रही है उनकी परेशानियां बढ़ सकती हैं। इस दौरान कुछ उपायों को करके शनि को अनुकूल बनाया जा सकता है। जिससे आपके जीवन की समस्याएं समाप्त होती है और संपन्नता एवं तरक्की प्राप्त की जा सकती है।
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shani dev
इस दौरान शनि देव को प्रसन्न करने के लिए सरसों का तेल, छाता, साबुत उड़द दाल, लोहा, तिल, काले रंग के कपड़े, अन्न, दवा आदि चीजों का दान करना चाहिए। इसके अलावा शनि मंदिर में जाकर शनिदेव का सरसों के तेल से अभिषेक करना चाहिए। इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं और शुभफल प्रदान करते हैं।
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शनिदेव के प्रकोप से बचने के लिए हनुमान जी की आराधना बेहद शुभफलदायक मानी जाती है। इसके लिए मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमानजी की पूजा करनी चाहिए और हनुमान चालीसा या फिर सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। पौराणिक कथा के अनुसार हनुमान जी के भक्तों पर शनिदेव अपनी अशुभ दृष्टि नहीं डालते हैं।

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जिन लोगों पर शनि की ढैय्या या फिर साढ़ेसाती चल रही है, उन्हें शनिवार के दिन काली गाय, काले कुत्ते और कौवे को भोजन खिलाना चाहिए। इसके अलावा शनिवार को व्रत भी करना चाहिए। इसके साथ ही शनिवार को घर में लोहे से बनी हुई चीजें नहीं लानी चाहिए।
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नीलम
शनिदेव के शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए आप नीलम रत्न भी धारण करना बहुत ही शुभफदायक रहता है लेकिन इसे धारण करने से पहले किसी योग्य ज्योतिष से सलाह अवश्य लेनी चाहिए, क्योंकि नीलम बहुत ही प्रभावशाली रत्न होता है। ज्योतिष के अनुसार वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ राशि वाले नीलम रत्न धारण कर सकते हैं लेकिन मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन राशि वालों को नीलम रत्न नहीं धारण करना चाहिए।
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शनि के अशुभ परिणाम से बचने के लिए करें इन वैदिक मंत्रों का जापॐ
 
ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।
ॐ शं शनैश्चराय नमः।।
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।

इन मंत्र का यदि प्रतिदिन जाप किया जाए तो शनिदेव शुभ फल प्रदान करते हैं और शनि की दशा, महादशा, ढैय्या, साढ़ेसाती का नकारात्मक प्रभावों से भी राहत मिलती है। यदि प्रतिदिन जाप नहीं कर सकते हैं तो कम से कम शनिवार के दिन जाप अवश्य करना चाहिए।
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