ज्योतिष की दुनिया में शनि की साढ़ेसाती सबसे ज्यादा डराने वाला बिंदू है। नवग्रहों में शनि को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। कलियुग में शनि का सबसे ज्यादा प्रभाव है। शनि के पिता सूर्य और माता छाया हैं इसलिए इसे छायानंदन भी कहा जाता है। शनि की कहानियां वेद, पुराण और धर्मशास्त्रों में मिलती हैं, लेकिन जनमानस में इसके बारे में बहुत सारे भ्रम भी व्याप्त हैं। हर जातक जीवन में कम से कम तीन बार साढ़े साती के प्रभाव में आता है। जन्म कुण्डली के चंद्रमा पर शनि के प्रभाव को साढ़ेसाती के रूप में देखा जाता है। मेरे पास अधिकतर लोग यह प्रश्न लेकर आते हैं कि साढ़ेसाती का क्या प्रभाव होता है, किन जातकों पर साढ़ेसाती का अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, किन जातकों पर कम प्रभाव पड़ता है, कौनसे जातक साढ़ेसाती से अप्रभावित होते हैं। क्या साढ़े सात साल का पूरा समय एक जैसा खराब रहता है। अगर नहीं तो कौनसा समय अधिक कठिन होता है और कौनसा समय अपेक्षाकृत अनुकूल होता है। इन सभी विषयों पर हम इस लेख में चर्चा करेंगे।