ज्योतिषशास्त्र में किसी भी जातक के भविष्य के बारे में अध्ययन करते समय कुंडली में शनि की स्थिति का विशेष महत्व होता है। शनिदेव को न्याय का देवता माना गया है। जिन जातकों की कुंडली में शनि अशुभ भाव में रहते हैं उनको काफी परेशानियां आती हैं। शनि की महादशा, साढ़ेसाती और ढैय्या से लोगों को कई तरह समस्याएं आती है। इस वर्ष शनि किसी अन्य राशि में नहीं जाएंगे। पूरे वर्ष शनि अपनी मकर राशि में रहेंगे। मकर राशि में शनि के होने से धनु, मकर और कुंभ राशि के जातकों पर साढ़ेसाती और मिथुन और तुला राशि पर ढय्या रहेगी। ऐसे में इन राशि के जातकों को शनि की अशुभ छाया और दोष से बचने के लिए शनि से जुड़ें उपाय जरूर करना चाहिए। हर शनिवार को शनिदेव के दर्शन और शनि के मंत्रों का जाप करना चाहिए।
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