Shani Uday: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह का विशेष महत्व होता है। शनि सबसे मंद चाल से चलने वाले ग्रह हैं, जिस कारण से इनका प्रभाव जातकों के जीवन पर लंबे समय तक रहता है। शनि को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में शनि अगर शुभ स्थान पर हैं तो ये ऐसे जातकों के जीवन में हर एक तरह की सुख-सुविधा देते हैं वहीं अगर कुंडली में शनि अशुभ भाव में हैं तो जातक के जीवन में कई तरह की परेशानियां आती हैं। आपको बता दें कि शनि अभी अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में अस्त अवस्था में विराजमान हैं, जिसके बाद 18 मार्च को सुबह 7 बजकर 49 मिनट पर उदय होंगे। शनि के उदय होने पर कुछ राशि के जातकों पर इसका अच्छा प्रभाव देखने को मिल सकता है।
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