वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को न्याय का देवता और कर्मफलदाता माना जाता है। सभी ग्रहों में शनि ऐसे ग्रह हैं जो सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं। मंद गति से चलने के कारण शनिदेव का शुभ-अशुभ प्रभाव काफी समय तक रहता है। अगर किसी जातक की कुंडली में शनि अशुभ भाव में हैं तो जातक को अशुभ फल की प्राप्ति होती है, वहीं अगर शनिदेव जातक की कुंडली में शुभ भाव में विराजमान हों तो हर तरह की सफलता दिलाते हैं। जिन जातकों की कुंडली में शनि अच्छे भाव में रहते हैं वे उच्च पदों की प्राप्ति करते हैं। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव भी जातकों के जीवन पर गहरा पड़ता है। आम धारणा के मुताबिक शनि की छाया को अशुभ माना जाता है लेकिन ऐसा नहीं हैं क्योंकि शनि कुछ राशि के जातकों पर अपनी विशेष कृपा द्दष्टि रखते हैं। आइए जानते हैं कौन-कौन सी हैं वे राशियां।
शनि की प्रिय राशियां
तुला राशि
शनिदेव तुला राशि के जातकों पर सबसे ज्यादा मेहरबान रहते हैं क्योंकि शनि इस राशि में उच्च के होते हैं। शनि के तुला राशि में उच्च के होने पर सबसे ज्यादा शुभ फल प्रदान करते हैं। तुला राशि में शनि होने पर जातकों को बहुत ही शुभ फल की विशेष प्राप्ति होती है। अगर तुला राशि पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चलती है तो भी इस पर नकारात्मक प्रभाव बहुत ही कम पड़ता है। शनिदेव तुला राशि के जातकों के जीवन में हमेशा सुख और समृद्धि प्रदान करते हैं।
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मकर राशि
- फोटो : अमर उजाला
मकर राशि
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिदेव की प्रिय राशियों में एक मकर राशि भी होती है। शनि का अशुभ प्रभाव मकर राशि के जातकों पर बहुत ही कम देखने को मिलता है। दरअसल मकर राशि के स्वामी स्वयं शनिदेव होते हैं। यानी शनिदेव के स्वामित्व में मकर राशि को संरक्षण हासिल है। ऐसे में जब शनि मकर राशि में होते हैं तो सबसे ज्यादा लाभ इसी राशि को मिलती है। शनि की कृपा द्दष्टि होने से मकर राशि वालों को हर एक क्षेत्र में सफलता मिलती है।
कुंभ राशि
तुला और मकर राशि के अलावा कुंभ राशि के जातकों पर भी शनिदेव की विशेष कृपा रहती है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि कुंभ राशि के स्वामी भी माने जाते हैं। इस तरह से शनि की कृपा हमेशा कुंभ राशि पर रहती है। शनिदेव की कृपा होने से इस राशि के जातकों का जीवन बहुत ही अच्छे से बीतता है। इन्हे हर एक मौके पर अच्छा लाभ प्राप्त होता है। इस राशि के जातक कम मेहनत करने पर अधिक सफलता प्राप्त होती है।