आठवें भाव में केतु- जिनकी जन्मकुंडली में केतु इस भाव में विराजमान हों, उनके जीवन में संघर्षों की अधिकता रहती है, उसे व्यर्थ में ही अपयश का भागीदार भी बनना पड़ता है। ऐसे लोगों पर तंत्र और षड्यंत्र दोनों का खतरा बना रहता है। स्वास्थ्य के प्रति हमेशा सावधान रहने की आवश्यकता रहती है। शुभ ग्रहों की दृष्टि न पड़ रही हो तो केतु जीवन पर्यंत कठोर परीक्षा लेते हैं।