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इस जन्म और पूर्वजन्म का सबसे बड़ा राज जानिए इस तरह

Tue, 28 Jun 2016 01:55 PM IST
राकेश झा/अमर उजाला, नई दिल्ली
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जन्‍म मृत्‍युु
शास्‍त्रों और पुराणों के अनुसार यह जीवन ही अंत नहीं है इस जीवन से पहले भी आपका जीवन था और आगे भी आप होंगे। बस बदलेगा तो आपका शरीर। हो सकता है क‌ि आपका पर‌िवार भी वही रहे ज‌िस पर‌िवार में आप पूर्वजन्म में थे। तो देख‌िए आपके पूर्व जन्म का राज इस जन्म की वजह कैसे बना।
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जब कुंडली के पहले घ्‍ार में गुरु रहे

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death kundli
ज्योत‌िषशास्‍त्र के अनुसार ज‌िस व्यक्त‌ि की जन्मकुंडली में गुरु लग्न स्‍थान यानी पहले घर में होता है उस व्यक्त‌ि के जन्म की वजह पूर्वजन्म का शाप या वरदान होता है। शाप के कारण जन्म लेने वाले व्यक्त‌ि को लग्न में गुरु होने पर भी आर्थ‌िक परेशानी और कष्ट का सामना करना पड़ता है लेक‌िन जो लोग वरदान के कारण जन्म लेते हैं वह धार्म‌िक व‌िचारों वाले और धन संपन्न होते हैं।
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जब कुंडली में गुरु दूसरे या अाठवें घ्‍ार में रहे

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गुरु ग्रह
ज‌िनकी कुंडली में गुरु दूसरे या आठवें घर में होता है वह धार्म‌िक व‌िचारों वाले होते हैं। ज्योत‌िषशास्‍त्र के अनुसार ऐसे व्यक्त‌ि पूर्वजन्म में साधु महात्मा की तरह जीवन जीने वाले थे। क‌िसी व‌िशेष कार्य या इच्छा की पूर्त‌‌ि के ल‌िए इनका जन्म हुआ माना जाता है।

जब गुरु रहे तीसरे घ्‍ार में

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गुरु
जन्मपत्री में गुरु तीसरे घर में होना बताता है क‌ि व्यक्त‌ि पूर्वजन्म में भी उसी पर‌िवार में था ज‌िसमें उसका वर्तमान जीवन है। लेक‌िन यह जीवन उसे क‌िसी मह‌िला के शाप या वरदान के कारण प्राप्त हुआ है।
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जब गुरु रहे चौथे घर में

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गुरु ग्रह
गुरु ज‌िस व्यक्त‌ि की जन्मपत्री में चौथे घर में होता है वह भी अपने पूर्वजन्म में उसी पर‌िवार में रहा होता है ज‌िसमें उसका जन्म हुआ है। ज्योत‌िषशास्‍त्र के अनुसार ऐसे व्यक्त‌ि का जन्म क‌िसी खास मकसद से होता है। व्यक्त‌ि की कोई इच्छा अधूरी रह जाने पर अपनी इच्छा पूरी करने के ल‌िए ऐसे व्यक्त‌ि का जन्म हुआ माना जाता है।
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जन्‍मपत्री में पांचें घ्‍ार में गुरु रहने पर

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जन्‍म मृत्‍यु
कुंडली में ‌ज‌िनके पांचवें या ग्यारहवें घर में गुरु होता है वह पूर्वजन्म में तांत्र‌िक या मांत्र‌िक रहा होगा ऐसा माना जाता है। ऐसे व्यक्त‌ियों को नकारात्मक उर्जा के कारण परेशानी होती है। संतान सुख के मामले में भी इन्हें कष्ट म‌िलता है।
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नवें घ्‍ार में जब गुरु बैठे रहें

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जन्‍म मृत्‍यु
ज‌िनकी जन्मपत्री में गुरु नवम स्‍थान में होता है वह बहुत ही भाग्यशाली होते हैं। पूर्वजन्म के अच्छे कर्मों के कारण यह ईश्वर के करीब पहुंचने के प्रयास में सफल होते हैं। इनमें प‌ितरों की कृपा दृष्ट‌ि रहती है ज‌िससे ज्ञान और मान-सम्मान की प्राप्त‌ि होती है।

जब दसवें घ्‍ार में गुरु रहे

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गुरु ग्रह
गुरु का दसवें घर में होना दर्शाता है क‌ि व्यक्त‌ि पूर्वजन्म में धार्म‌िक व‌िचारों वाला रहा होगा और अपने पूर्वकर्मों के कारण वह इस जन्म में सुधारक और धर्मोपदेशक होता है। ऐसे व्यक्त‌ि समाज‌‌िक कार्यों में आगे रहने वाले रहते हैं। प्रबंध्‍ान के काम में भी यह कुश्‍ाल रहते हैं।
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जब गुरु रहे बारहवें घ्‍ार में

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जन्‍म मृत्‍यु
गुरु अगर जन्मपत्री में बारहवें घर में है तो व्यक्त‌ि आदर्श और धर्म-कर्म में रुच‌ि रखने वाला होता है। ऐसे व्यक्त‌ि आदर्शवादी होते हैं और जरुरत के समय दूसरों की सहायता करते हैं। ऐसा भी देखा गया है क‌ि इनके घर के आस-पास कोई धार्म‌िक स्‍थल होता है।
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