ग्रहों में युवराज कहे जाने वाले चंद्र पुत्र बुध 1 अगस्त की मध्यरात्रि के बाद 3 बजकर 30 मिनट पर अपनी स्वग्रही मिथुन राशि की यात्रा समाप्त करके चंद्रमा की राशि कर्क में प्रवेश कर चुके हैं। बुध के राशि परिवर्तन का प्रभाव युवाओं, शिक्षा और व्यापार के क्षेत्र में सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। बुध चंद्रमा को अपने शत्रु मानते हैं किंतु चंद्रमा बुध को अपना मित्र मानते हैं। तभी इन दोनों के परस्पर विरोधाभासी प्रभाव दिखते रहते है। बुध मिथुन और कन्या राशि के स्वामी होते हैं। मीन राशि में नीच राशिगत और कन्या राशि में उच्च राशिगत में कहे गए हैं। इनके राशि परिवर्तन का सभी 12 राशियों पर कैसा प्रभाव पड़ेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।