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Rahu: पलभर में किस्मत बदल देता है राहु, कुंडली में बैठा सही गणित तो दौलत-शोहरत के ढेर पर बैठ जाएंगे आप

Mon, 26 May 2025 01:41 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वैदिक ज्योतिष में राहु को पापी ग्रह माना गया है। इसे ज्योतिष में एक छाया ग्रह के रूप में जाना जाता है, क्योंकि इसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है। अगर किसी की कुंडली में राहु शुभ स्थान पर विराजमान होते हैं, तो पल भर में व्यक्ति की किस्मत बदल सकती है।
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कुंडली में राहु का प्रभाव - फोटो : Amar Ujala
Effects Of Rahu In Horoscope: आपने कई बार ऐसे लोगों की कहानी सुनी होगी, जो रातों-रात फर्श से अर्श तक का सफर तय कर लेते हैं। ऐसे में हर कोई इनकी किस्मत की दाद देता है तो कोई कहता है क्या स्मार्ट व्यक्ति है सही समय पर सही फैसले लेकर जिंदगी में आगे बढ़ गया। जाहिर है जिंदगी में हमेशा अभिव्यक्ति की कीमत ज्यादा रही है यानी पर्दे के पीछे की गई मेहनत से ज्यादा सलाम दुनिया पर्दे के सामने ठोंकती है।

बहरहाल, जमीन से बुलंदियों तक का सफर तय करने के पीछे लोग भले ही कई तरह की कहानियां गढ़ते रहें लेकिन कामयाबी के पीछे किस्मत कनेक्शन से इंकार नहीं किया जा सकता. बात यदि ज्योतिष की दृष्टि से करें तो अचानक सफलता या रातों-रात जिंदगी बदल देने के पीछे राहु ग्रह को माना जाता है। अगर किसी की कुंडली में राहु शुभ स्थान पर विराजमान होते हैं, तो पल भर में व्यक्ति की किस्मत बदल सकती है। वहीं यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु अशुभ स्थान पर स्थित हो या पीड़ित हो, तो उसके जीवन में इसके नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

वैदिक ज्योतिष में राहु को पापी ग्रह माना गया है। इसे ज्योतिष में एक छाया ग्रह के रूप में जाना जाता है, क्योंकि इसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है। यह भ्रम पैदा करने का कारक भी माना जाता है। इस ग्रह को आमतौर पर कठोर बोलचाल, जुए की प्रवृत्ति, अनावश्यक यात्राएं, चोरी, बुरे काम, त्वचा संबंधी रोग और धार्मिक यात्राओं से जोड़ा जाता है। राहु ग्रह किसी भी राशि का स्वामी नहीं माना जाता, लेकिन यह (वृषभ वैदिक पाराशर ज्योतिष के अनुसार)  मिथुन राशि में उच्च स्थिति में और धनु राशि में नीच अवस्था में रहता है।
 

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शुभ स्थिति में राहु के प्रभाव - फोटो : amar ujala
शुभ स्थिति में राहु के प्रभाव
वैदिक ज्योतिष के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में राहु लग्न भाव में स्थित हो, तो उसका व्यक्तित्व आकर्षक और प्रभावशाली सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित माना जाता है। हालांकि इसका प्रभाव पूरी तरह से उस राशि पर निर्भर करता है जिसमें राहु स्थित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि राहु शुभ स्थिति में हो और कुंडली में बलवान हो, तो यह व्यक्ति को तेज बुद्धि और भाग्यशाली बनाता है। मजबूत राहु के प्रभाव से व्यक्ति धार्मिक कार्यों में रुचि लेता है और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त करता है।

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कमजोर या पीड़ित राहु के प्रभाव - फोटो : adobe stock
कमजोर या पीड़ित राहु के प्रभाव
अगर कुंडली में राहु अशुभ या पीड़ित स्थिति में हो, तो इसके दुष्प्रभाव सामने आते हैं। ऐसे व्यक्ति में नकारात्मक आदतें विकसित हो सकती हैं, जैसे छल, कपट, और धोखा देना। वह मांसाहार, शराब और अन्य नशे की आदतों का शिकार हो सकता है। राहु का अशुभ प्रभाव व्यक्ति को अधार्मिक बनाता है। 

पीड़ित राहु का असर व्यक्ति के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इससे शारीरिक रोग उत्पन्न हो सकते हैं, जैसे हिचकी, मानसिक असंतुलन, पाचन तंत्र की गड़बड़ी, अल्सर और गैस से जुड़ी समस्याएं। 

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राहु ग्रह का प्रत्येक भाव में प्रभाव - फोटो : adobe stock
राहु ग्रह का प्रत्येक भाव में प्रभाव

1. लग्न भाव (पहला भाव) में राहु
व्यक्ति आकर्षक, रहस्यमयी और प्रभावशाली होता है। आत्मविश्वास अधिक होता है, लेकिन अहंकार की भी प्रवृत्ति हो सकती है।वैवाहिक जीवन में परेशानियाँ आ सकती हैं।

2. धन भाव (दूसरा भाव) में राहु
व्यक्ति को धन की प्राप्ति होती है, लेकिन धन टिकता नहीं है। बोलचाल में कड़वाहट या धोखे की प्रवृत्ति हो सकती है। पारिवारिक जीवन में खटास आ सकती है।

3. पराक्रम भाव (तीसरा भाव) में राहु
साहसी, जोखिम लेने वाला और रणनीतिक व्यक्ति बनाता है। छोटी यात्राएं लाभदायक होती हैं। भाई-बहनों से तनाव संभव है।


 
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कुंडली का छठा भाव - फोटो : अमर उजाला
4. सुख भाव (चौथा भाव) में राहु
गृहस्थ जीवन में अस्थिरता, मानसिक अशांति। माता से दूरी या संबंधों में तनाव। वाहन और संपत्ति के मामलों में अनियमितताएं या विवाद हो सकते हैं।

5. संतान भाव (पाँचवां भाव) में राहु
संतान सुख में देरी या बाधा। प्रेम संबंधों में धोखा या भ्रम की स्थिति। रचनात्मकता तो होती है लेकिन मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है।

6. ऋण-शत्रु-रोग भाव (छठा भाव) में राहु
रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। शत्रु परास्त होते हैं, लेकिन कानूनी विवाद संभव हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ रह सकती हैं, विशेषकर पेट या त्वचा से जुड़ी।
 
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कुंडली का नवम - फोटो : अमर उजाला
7. विवाह भाव (सातवां भाव) में राहु
वैवाहिक जीवन में धोखा, भ्रम या विवाहेतर संबंध की आशंका। जीवनसाथी रहस्यमयी या विदेशी हो सकता है। साझेदारी में तनाव रहता है।

8. आयु भाव (आठवां भाव) में राहु
रहस्य, गूढ़ विद्या, टैरो, ज्योतिष आदि में रुचि। अचानक धन लाभ या हानि। दुर्घटना या ऑपरेशन की संभावना।

9. भाग्य भाव (नवां भाव) में राहु
परंपरागत धर्म से हटकर सोच। विदेशी यात्राएं संभव। गुरु या पिता से मतभेद।
 
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राहु ग्रह का प्रत्येक भाव में प्रभाव - फोटो : adobe stock
10. कर्म भाव (दसवां भाव) में राहु
करियर में चढ़ाव-उतार। व्यक्ति बड़ी कंपनियों, राजनीति या गुप्त संस्थानों से जुड़ सकता है। प्रसिद्धि मिलती है लेकिन स्थायित्व की कमी हो सकती है।

11. लाभ भाव (ग्यारहवां भाव) में राहु
ग्यारहवे भाव में राहु का होना बहुत शुभ माना जाता है। इसमें अचानक धन लाभ हो सकता है। बड़े और प्रभावशाली लोगों से संपर्क होते हैं। मित्रों से धोखा या भ्रम की संभावना रहती है।

12. व्यय भाव (बारहवां भाव) में राहु
विदेश यात्रा या प्रवास संभव। नींद की समस्या, मानसिक तनाव। गुप्त खर्च या चोरी से नुकसान।
 

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मंत्र  - फोटो : adobe stock
मंत्र 
राहु का वैदिक मंत्र
ॐ कया नश्चित्र आ भुवदूती सदावृध: सखा। कया शचिष्ठया वृता।।

राहु का तांत्रिक मंत्र
ॐ रां राहवे नमः

राहु का बीज मंत्र
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
 

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राहु को मजबूत करने के उपाय - फोटो : freepik
राहु को मजबूत करने के उपाय
राहु के दोष को कम करने के लिए नीले रंग के कपड़े पहनें। शराब और मांस का सेवन न करें। शिव साहित्य और शिवपुराण का पाठ करें। राहु के दोष से बचने के लिए, सरस्वती पूजा भी लाभदायक मानी जाती है। इसके अलावा आप अमावस्या के दिन पीपल के नीचे दीपक जलाएं और गरीबों को दान करें।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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