भारत वर्ष की कुंडली मे बृहस्पति अष्टम (संघर्ष, मृत्यु आदि) व एकादश (लाभ, प्रसिद्धि, जनता को होने वाले लाभ, रोजी-रोजगार आदि) का स्वामी है। लेकिन वृषभ लग्न का मारक भी गुरु है, जिसके कारण देश की आर्थिक स्थिति खराब होगी, राष्ट्र में सरकार के प्रति असन्तोष बढ़ेगा, महंगाई बढ़ेगी, बेरोजगारी से जहां असंतोष फैलेगा वहीं किसानों के अंदर भी सरकार के प्रति विद्रोहात्मक स्वभाव उत्पन्न होगा।
लोगो के अंदर सरकार के प्रति अविश्वसनीयता की स्थिति बनेगी, मंगल की राशि मे गया गुरु धार्मिक उन्माद पैदा कर सकता है। लग्न से अष्टम शनि, निम्न वर्ण के लोगो का सरकार से विरोध कराएगा तथा मंगल की नकारात्मक राशि का गुरु उच्च वर्ण के लोगो का भी सरकार पर भरोसा तोड़ेगा। सारांश यह कि गुरु का यह राशि परिवर्तन, वर्तमान सरकार के लिए सुखद परिणाम लाने वाला नहीं कहा जाएगा।