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गुरु की वक्री चाल: आज से गुरु चलेंगे कुंभ राशि में उल्टी चाल, जानें सभी 12 राशियों पर प्रभाव

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कुंभ राशि में गुरु वक्री: नवग्रहों में देवगुरु बृहस्पति को सबसे बड़ा और प्रभावशाली माना गया है। गुरु को शुभ ग्रहों के रूप में मान्यता प्राप्त है। - फोटो : अमर उजाला
नवग्रहों में देवगुरु बृहस्पति को सबसे बड़ा और प्रभावशाली माना गया है। गुरु को शुभ ग्रहों के रूप में मान्यता प्राप्त है। गुरु को शुभता, सत्यता, न्याय, सद्गुण व सुख देने वाला ग्रह माना गया है। देवगुरु बृहस्पति को कुण्डली में द्वितीय, पंचम, नवम, दशम एवं एकादश भाव का कारक माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार यह पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रों का स्वामित्व रखते हैं। यह बारह महीनों में चार महीने वक्री रहते हैं। देवगुरु बृहस्पति ग्रह एक राशि में लगभग एक वर्ष रहते हैं और 12 राशियों का चक्र पूरा करने में लगभग 13 वर्ष का समय लेते हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जो व्यक्ति बृहस्पति से प्रभावित होते हैं वे कफ प्रकृति के होते हैं और वे मोटे होते हैं। इनकी आवाज भारी होती है और आंखें एवं बाल भूरे अथवा सुनहरे रंग के होते हैं। बृहस्पति से प्रभावित व्यक्ति धार्मिक,आस्थावान, दर्शनिक, विज्ञान में रूची रखने वाले एवं सत्यनिष्ठ होते हैं।
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गुरु का परिवर्तन - फोटो : अमर उजाला
देवगुरु बृहस्पति 20 जून 2021 को शाम 8 बजकर 35 मिनट में कुंभ राशि में वक्री होकर 14 सितंबर 2021 मकर राशि में प्रवेश करेंगे। वैदिक ज्योतिष में गुरु सबसे अधिक लाभकारी ग्रह है। यह आध्यात्मिकता, स्वतंत्रता, ज्ञान, गुरु और इनसे मिलते-जिलते गुणों को नियंत्रित करते हैं। ज्योतिष शास्त्र की मान्यता के अनुसार जब शुभ ग्रह वक्री गति से चलें तो उसका परिणाम शुभ ही होता है। इस मान्यता के अनुसार देवगुरु बृहस्पति के वक्री होने से आगामी दिनों में आमजन को महंगाई से राहत की उम्मीद की जा सकती है। 

देवगुरु बृहस्पति की वक्री चाल का प्रभाव शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण के साथ ही राष्ट्र हित के विषयों में देखने को मिलेगा। देवगुरु बृहस्पति के वक्री होने के अगले दिन विश्व योग दिवस भी है जिसके प्रभाव से शासक और प्रशासक वर्ग में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भी आम जनमानस के स्वास्थ्य को लेकर भी कई सकारात्मक परिवर्तन आने की उम्मीद है। देवगुरु बृहस्पति के वक्री होने का मौसम पर भी सकारात्मक प्रभाव रहेगा। 20 जून 2021 को गुरु के कुंभ राशि में वक्री होने के साथ ही वे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक या नकारात्मक रूप से प्रभावित करेंगे। आइए जानते हैं राशिनुसार देवगुरु बृहस्पति का वक्री प्रभाव...
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राशि
मेष राशि- गुरु आपकी राशि से ग्यारहवें भाव पर वक्री हो रहे हैं आपको कार्यक्षेत्र में सफलता हासिल होगी। मान-सम्मान में वृद्धि के योग बनेंगे। आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी। रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। नौकरी में तरक्की के भी योग बनेंगे।

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राशि
वृषभ राशि- इस समय गुरु आपकी राशि से 10वें भाव यानि कर्म भाव में रहेंगे। यह समय व्यापार के लिए तो अच्छा है, आर्थिक पक्ष सामान्य रहने के बीच किसी भी कार्य में जल्दबाजी से बचें। साथ ही वाद- विवाद में न पड़ें।
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मिथुन
मिथुन राशि- इस समय गुरु आपकी राशि से 9वें भाव यानि भाग्य भाव में रहेंगे। जिसके चलते आपको मिले-जुले परिणाम मिलेंगे। पारिवारिक जीवन सुखमय रहने की उम्मीद के बीच ये समय शिक्षा क्षेत्र के लोगों के लिए थोड़ा कठिन रहने की संभावना है।
 
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राशि
कर्क राशि - इस समय गुरु आपकी राशि से 8वें भाव यानि आयु भाव में रहेंगे। जिसके कारण आपको सेहत सहित कई अन्य प्रकार की समस्याओं से दो-चार होना पड़ सकता है। धन-लाभ की संभावना के बीच किसी भी कार्य को अच्छे से समझने के बाद ही शुरु करें। बचत की भी इस समय आपको कोशिश करनी होगी।
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राशि
सिंह राशि- वक्री गुरु के प्रभाव से सिंह राशि वालों को व्यापार में मुनाफा हो सकता है। जीवनसाथी के साथ मतभेद हो सकते हैं। बेवजह किसी से वाद-विवाद न करें। विवाह संबंधी मामलों में सफलता हासिल हो सकती है। धार्मिक कार्यों में रूचि बढ़ेगी। संपत्ति में बढ़ोत्तरी हो सकती है।

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राशि
कन्या राशि- इस समय गुरु आपकी राशि से छठें भाव यानि शत्रु व रोग भाव में रहेंगे। ऐसे में सेहत से जुड़ी परेशानियों के साथ शत्रु आप पर हावी होने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा इस दौरान वैवाहिक जीवन में दिक्कतों के अलावा कार्यक्षेत्र में भी परेशानियां सामने आ सकती हैं। जबकि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग मेहनत के दम पर सफलता प्राप्त कर सकेंगे।

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राशि
तुला राशि- इस समय गुरु आपकी राशि से 5वें भाव यानि बुद्धि व पुत्र भाव में रहेंगे। इस दौरान आपको अपनी बुद्धि के प्रयोग से समस्याओं से बाहर आना होगा। आर्थिक पक्ष कमजोर रहने की संभावना के बीच इस समय लेन-देन व निवेश से बचें। सेहत का भी विशेष ध्यान रखना होगा।

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राशि
वृश्चिक राशि- इस समय गुरु आपकी राशि से चौथे भाव यानि सुख व माता भाव में रहेंगे। इस समय आर्थिक पक्ष मजबूत होने के चलते आप नया वाहन या मकान खरीद सकते हैं। वहीं वाद विवाद से दूर रहते हुए मेहनत से सफलता प्राप्त करेंगे, लेकिन सेहत का ध्यान रखते हुए पारिवारिक जीवन में कुछ परेशानियों से भी जुझना पड़ सकता है।

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राशि
धनु राशि- वक्री गुरु आपके तीसरे भाव में वक्री हो रहे हैं इसके प्रभाव से आपके साहस में वृद्धि होगी। व्यापारियों को लाभ हो सकता है। इस दौरान सुख-सुविधाओं में वृद्धि हो सकती है। किसी करीबी के साथ अनबन हो सकती है।

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राशि
मकर राशि- इस समय गुरु आपकी राशि से दूसरे भाव यानि धन व वाणी भाव में रहेंगे। ऐसे में खर्चों में वृद्धि के चलते आपको आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं सेहत का विशेष ध्यान रखने की जरूरत के साथ ही पारिवारिक जीवन में भी कुछ समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
 

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राशि
कुंभ राशि- इस समय गुरु आपकी ही राशि में यानि लग्न भाव में रहेंगे। जिसके कारण पद- प्रतिष्ठा के साथ ही मान-सम्मान में बढ़ोतरी के योग के बीच आर्थिक पक्ष सामान्य रहेगा। लेकिन इस समय सेहत का खास ध्यान रखते हुए किसी बाहरी व्यक्ति पर विश्वास करने से पहले अच्छी से सोच लें।
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राशि
मीन राशि- इस समय गुरु आपकी राशि से 12वें भाव यानि व्यय भाव में रहेंगे। इस समय आप शत्रुओं पर जीत हासिल करने के साथ ही कुछ धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों से भी जुड़ सकते हैं। लेकिन इस समय खर्चें को लेकर चिंता हो सकती है, अत: खर्चों में कमी लाने की कोशिश करनी चाहिए। 
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